भोपाल, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के वनांचल क्षेत्र में बढ़ता कुपोषण, अशिक्षा और स्वास्थ्य समस्या राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। इसी के मद्देनजर राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों की समस्या के लिए दीनदयाल वनांचल सेवा योजना बनाई है, जिसकी शुरुआत यहां गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।
राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई योजना में स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला बाल विकास विभाग वन विभाग के साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि वनांचल की तीनों प्रमुख समस्याओं का निपटारा किया जा सके।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना की शुरुआत करते हुए कहा कि कुपोषण, अशिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए सब विभाग मिलकर काम करें। दीनदयाल वनांचल सेवा योजना वन क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की क्रांतिकारी पहल है।
मुख्यमंत्री चौहान ने आगे कहा कि विभागों के सम्मिलित प्रयासों से कुपोषण और अशिक्षा की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी। इन समस्याओं से निपटने के लिए सजग और बेहतर प्रयास की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक बनाकर परिवर्तन लाया जा सकता है। योजना की मूल भावना को समझकर समन्वय से कार्य करे तो बेहतर परिणाम मिलेंगे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि यह योजना एकात्म मानववाद और अंत्योदय को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इससे वनवासी मजबूत होगा तथा वनों के विकास में मदद करेगा। महिला वनरक्षकों को स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस योजना को सार्थक पहल बताते हुए महिला-बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि इस योजना से वन ग्रामों की समस्याओं का बेहतर तरीके से समाधान किया जा सकेगा। वनीकरण और वनोपज बढ़ाने में महिला-बाल विकास विभाग मदद करेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि दीपावली के अवसर पर वन विभाग वनवासियों को फलों और सब्जियों के पौधे देने की योजना बनाएं।
स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह ने कहा कि कुपोषण को दूर करने और बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह योजना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि वन विभाग प्रत्येक स्कूल और आंगनवाड़ी को फल और सब्जी लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराए, जिससे बच्चों को फल और ताजी सब्जी के रूप में पोषक आहार मिले।
इस मौके पर मुख्यमंत्री चौहान ने योजना के ब्रॉशर और वनरक्षकों के लिए स्वास्थ्य प्रशिक्षण माड्यूल का विमोचन किया। कार्यक्रम में वन, स्वास्थ्य, महिला-बाल विकास और शिक्षा विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।
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