भोपाल, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को हुई सभा में चार वामपंथी दलों ने कांग्रेस और भाजपा पर जमकर हमला बोला और राज्य की ‘बदहाली’ के लिए दोनों दलों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इन दलों ने प्रदेश को बारी-बारी से लूटा है।
माकपा, भाकपा, एसयूसीआई सी तथा भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक नेताओं ने प्रदेश की जनता की बुरी हालात के अनगिनत उदाहरण रखते हुए कहा कि 10-10 साल मिल-बांटकर राज करने वाली दोनों पार्टियों ने लूटा है। इतना ही नहीं, दोनों सरकारों की भ्रष्ट और जनविरोधी नीतियों ने भूख, बेकारी, नारी उत्पीडन, भ्रष्टाचार, आदिवासियों की बेदखली, जमीन की लूट, महंगाई के मामले में मप्र को शीर्ष पर पहुंचा दिया है।
सभा को सीपीआई के पूर्व सांसद अजीज पाशा, माकपा केंद्रीय समिति सदस्य बादल सरोज, एसयूसीआई सी केंद्रीय समिति सदस्य सत्यवान, भाकपा (माले) के देवेंद्र सिंह चौहान के अलावा अरविंद श्रीवास्तव (सीपीआई), प्रताप सामल (एसयूसीआई सी), संध्या शैली (सीपीआई एम) तथा सीपीआई माले के विनोद रावत ने संबोधित किया।
सभा में नेताओं ने कहा कि पेयजल, स्वास्थ्य, बिजली और आवास तक आम जन के हाथ से छिन से गए हैं। किसानों को आत्महत्या के कगार पर तथा मजदूरों को बंधुआ गुलामी की दशा में पहुंचा दिया गया है।
वामपंथी दलों के नेताओं ने भाजपा राज को अब तक का सबसे भ्रष्ट राज तथा अब तक के सबसे बड़े घोटाले व्यापमं को भाजपा सरकार की उपलब्धि बताया। वामदलों ने कहा कि निराश्रित पेंशन, छात्रवृत्ति, दवा, चारा, मनरेगा और रेत सहित खदानों के घोटाले हुए हैं। प्रदेश के सर्वोच्च नेतृत्व की इनमें भागीदारी है। मगर उन्हें बचाने की हर संभव कोशिशें हो रही हैं।
वक्ताओं ने बढ़ती सांप्रदायिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कारपोरेट की लूट से ध्यान भटाकने के लिए योजनाबद्ध तरीके से सांप्रदायिकता भड़काई जा रही है। नेताओं ने जनता से सजग होकर इसका मुकाबला करने की अपील की।
सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पश्चिम बंगाल में जारी हिंसा तथा मप्र में लोकतंत्र के क्षरण, अध्यापकों के दमन के विरुद्ध 14 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी विरोध दिवस मनाने का फैसला लिया है।
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