भोपाल, 20 अगस्त (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में भारी बारिश का कहर जारी है। नदी-नाले उफान पर हैं, छोटे मकान से लेकर तीन मंजिली इमारत तक ढह गई है। बीते 24 घंटों में बारिश 17 लोगों को निगल गई। वहीं बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य जारी है। इसमें सेना और हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। विंध्य और बुंदेलखंड के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। निचली बस्तियों में पानी भर गया है। विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। जनजीवन बुरी तरह बाधित है, कई स्थानों का सड़क संपर्क टूट गया है।
सागर जिले के राहतगढ़ में बनियानी घाट क्षेत्र में शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात को शिल्पकार परिवार का मकान ढह गया। हादसे के समय पूरा परिवार सोया हुआ था। जब तक मलबा हटाया गया, तब तक सात लोगों की मौत हो चुकी थी। तीन लोग घायल हैं।
इस हादसे में शिल्पकार परिवार की मनू रानी (55), विकास (18), विपिन (13), संजना (10), कल्लू (30), सरला (25) तमन्ना (डेढ़ वर्ष) की मौत हो गई है, वहीं तीन गंभीर हालत में हैं, जिन्हें सागर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इसी तरह सतना जिले की धार्मिक नगरी मैहर में मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) की नवनिर्मित तीन मंजिला इमारत शनिवार को ढह गई।
पुलिस नियंत्रण कक्ष के अनुसार, हाउसिंग बोर्ड की नवनिर्मित तीन मंजिली इमारत अचानक ढह गई।
पुलिस अधीक्षक मिथिलेश शुक्ला ने बताया कि इमारत के मलबे को हटाने के लिए राहत व बचाव कार्य चल रहा है। अब तक चार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, वहीं दो लोगों के शव मिले हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बारिश की स्थिति और सुविधा मुहैया कराने को लेकर शनिवार को अफसरों के साथ बैठक की। बैठक में चौहान ने निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों के बांधों से पानी एक साथ न छोड़ा जाए। बांध के निचले क्षेत्र के गांवों में पहले से इसकी सूचना दी जाए।
उन्होंने कहा कि पानी उतरने के बाद नुकसान के सर्वे का काम तुरंत शुरू किया जाए। पूरे प्रदेश में निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों का सर्वे कराया जाए और इन परिवारों को दूसरे स्थान पर बसाने की कार्य योजना बनाई जाए।
बैठक में बताया गया कि अतिवृष्टि से रीवा शहर सहित जिले के 35, सतना जिले के 62 गांव प्रभावित हैं, जिनमें पांच गांव ज्यादा प्रभावित हैं और पन्ना जिले के 41 गांव पानी से घिरे हुए हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सतना जिले में 4,215 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इसी जिले में तीन नदी- टमस, सिमरावल और छोटी टमस में ज्यादा पानी है। रीवा शहर में छह मोहल्ले ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
पिछले 20 घंटों में रीवा शहर से 550 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इसी तरह जवा तहसील और त्यौथर तहसील से एक हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इसी तरह रीवा जिले में कुल एक हजार पांच सौ पचास और पन्ना जिले के 144 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में एनडीआरएफ की तीन और एसडीआरएफ की 12 टीम बचाव कार्य में लगी है। साथ ही 33 डीआरसी संचालित हैं।
मदद के लिए सेना को बुलाया गया है और दो हेलीकॉप्टर भी सतना में रखे गए हैं। बचाव कार्य में 30 मोटर बोट भी लगी हैं। बाढ़ व अतिवृष्टि से प्रभावित लोगों के लिए रीवा में 38 शिविर संचालित हैं, जिनमें 3500 लोग ठहरे हैं। इसी तरह सतना में 26 शिविर में 2500 लोग और पन्ना में तीन शिविर में 100 लोग ठहरे हैं।
प्रदेश में पिछले 24 घंटों में अतिवृष्टि से 17 लोगों की मृत्यु हुई है। इसमें सागर जिले के राहतगढ़ में सात और कटनी में दो लोगों की मौत मकान गिरने और सतना के मैहर में तीन मंजिली इमारत के ढहने से दो की मौत हुई है।
इसके साथ ही छतरपुर में तीन तथा रायसेन जिले के सांची में तीन लोगों की मौत पानी में बहने से हुई है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की है। रीवा, सतना और कटनी में राहत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है।
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