बड़वानी, 31 जुलाई (आईएएनएस)। नर्मदा नदी को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर द्वारा की गई कथित टिप्पणी को लेकर मचे बवाल के बाद उनके समर्थकों ने सफाई दी है। उनका कहना है कि मेधा ने कहा था कि ‘शासनकर्ता नर्मदा के साथ वेश्या जैसा व्यवहार करते हैं जो कि नर्मदा की कार्पोरेट घरानों के लिए हो रही लूट से जाहिर है।’
नर्मदा समर्थक समूह के राजकुमार सिन्हा व अमूल्य निधि ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि नर्मदा बचाओ आंदोलन समेत अनेक सामाजिक समूह और संवेदनशील नागरिक नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की लूट तथा अन्यायपूर्ण, बिना पुनर्वास विस्थापन के खिलाफ लामबंद हुए हैं, जिससे शोषकों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिनके हित प्रभावित हो रहे हैं, वे नर्मदा तथा अन्य नदियों के संरक्षण के अभियानों को बदनाम करने में लगे हुए हैं।
नर्मदा समर्थक समूह की ओर से जारी बयान में दावा किया गया है कि मेधा ने नर्मदा पर ‘वेश्या’ बनने का आरोप नहीं लगाया था और न कभी लगा सकती हैं। उनका कहना था, “जब नर्मदा सभी आमजनों के लिए माता या मातेसरी है, तब शासनकर्ता उसके साथ वेश्या जैसा व्यवहार करते हैं, जो कि नर्मदा की कार्पोरेट्स के लिए हो रही लूट से जाहिर है।”
नर्मदा समर्थक समूह का आरोप है कि गुजरात की चार लाख हेक्टयर सिंचित जमीन को उद्योग के लिए आरक्षित किया जा रहा है। वहीं कोका कोला और टाटा जैसे उद्योगों के साथ पहले से ही 90 लाख लीटर प्रतिदिन पानी का अनुबंध कर लिया गया है।
समूह का कहना है कि नर्मदा की रेत निकाल कर नर्मदा तल को बुरी तरह से खोखला कर दिया गया है, इससे जलीय जीवों और वनस्पतियों की कई प्रजातियां खतरे में आ गई हैं।
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