शहडोल, 10 सितंबर (आईएएनएस)। ओड़िशा के कालाहांडी में दाना मांझी ने अपने कंधे पर पत्नी का शव ढोया था। उसकी वह तस्वीर अभी लोग को भुला भी नहीं पाए थे कि मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में एक शव को साइकिल पर 20 किलोमीटर तक ढोए जाने की तस्वीर सामने आई है। यहां भी शव को ले जाने के लिए एंबुलेस नहीं मिला।
शहडोल जिले के अमिलिहा गांव की रामबाई (70) अपनी बेटी फूलबाई और दामाद गोरे सिंह के साथ कटहरी गांव में रहती थी। गोरे सिंह ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि गुरुवार को उसकी सास की मौत हो गई। उसके शव को 20 किलोमीटर दूर अमिलिहा ले जाना था, ताकि वहां उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।
गोरे सिंह का कहना है कि उसने शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की, मगर शुक्रवार की दोपहर तक जब उसे एंबुलेंस या कोई अन्य वाहन नहीं मिला, तब वह अपनी पत्नी और एक अन्य महिला के साथ शव को साइकिल पर रखकर चल पड़ा। लगभग छह घंटे में उसने 20 किलोमीटर का रास्ता तय किया।
गोरे सिंह ने अपनी सास के शव को चादर में लपेटकर साइकिल के कैरियर से बांध दिया था, ताकि वह गिर न जाए। 20 किलोमीटर के सफर में पत्नी व एक अन्य महिला उसके साथ थी। वह शुक्रवार को दोपहर तीन बजे कटहरी से निकला था और रात नौ बजे अमिलिहा पहुंचा।
शहडोल के जिलाधिकारी एम.के. शुक्ला ने आईएएनएस को बताया कि उन्हें एक शव को साइकिल पर ले जाए जाने का पता चला है। उन्होंने इस घटना के बारे में अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से जानकारी मांगी तो पता चला कि संबंधित व्यक्ति ने प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग या गांव के सचिव तक से वाहन की मांग नहीं की थी।
उनका कहना है कि अगर गोरे सिंह ने प्रशासन, पंचायत या सचिव से शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग करता तो उसे कोई वाहन जरूर मुहैया कराया जाता।
dharmpath.com dharmpath