लखनऊ, 25 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के बयान की आलोचना की है। राज्यसभा सदस्य मायावती ने जाति आधारित आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था की समीक्षा कर उसे खत्म करने के प्रयास को ‘दलित विरोधी संकीर्ण सोच’ करार दिया।
मायावती ने कहा, “जिस देश व समाज में हर क्षेत्र में व हर स्तर पर जन्म के आधार पर जातिवादी व्यवहार का प्रचलन आम बात हो, वहां उस जात-पात के अभिशाप के संवैधानिक निदान को समाप्त करने की बात करना अन्याय, शोषण व उत्पीड़न एवं अमानीयवता को और ज्यादा बढ़ावा देना होगा।” उन्होंने सोमवार को एक बयान जारी कर ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अहमदाबाद में अधिकारियों व स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों की बैठक में शनिवार को जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा करने की जो बात कही है, वह एक मनुवादी सोच की उपज होने की शंका जाहिर करती है।
मायावती ने कहा, “वैसे भी यह सर्वविदित है कि आरएसएस की संकीर्ण व घातक मानसिकता रखने वालों द्वारा समीक्षा की बात करने का अर्थ उस व्यवस्था को खत्म करना ही होता है।”
बसपा प्रमुख ने कहा कि एक तरफ तो हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की जातिवादी उत्पीड़न के कारण आत्महत्या करने को मजबूर किया गया और यह मामला अभी शांत भी नहीं हो पाया है कि एक उच्च संवैधानिक पद पर बैठी महिला (सुमित्रा) ने अपने बयान से ‘आग में घी’ डालने का काम किया है।
मायावती ने कहा कि रोहित वेमुला को अगर मरने के बाद भी न्याय नहीं मिला तो यही माना जाएगा कि प्रधानमंत्री का इस मामले में भावुक हो जाना एक ‘नाटकबाजी’ थी। उनके आंसू वास्तव में ‘घड़ियाली’ थे।
उन्होंने कहा कि समाज में हजारों वर्षो से जाति के नाम पर चला आ रहा भेदभाव, असमानता, शोषण एवं अन्याय अगर जाति पर आधारित है, तो उसका समाधान भी जातीय आधार पर ढूंढ़ना होगा।
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