नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि मालदीव की सुरक्षा और स्थिरता भारत के हित में है।
मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गय्यूम के साथ द्विपक्षीय प्रतिनिधिमंडल स्तर की वर्ता के बाद दोपहर के भोज में संवाददाताओं से मोदी ने कहा, “मालदीव, भारत के घनिष्ठतम साझीदारों में एक है। मालदीव की सुरक्षा व स्थिरता भारत के हित में है।”
मालदीव में चीन के बढ़ते प्रभाव और निवेश के बीच प्रधानमंत्री की ओर से इस तरह का बयान आया है।
वार्ता के बाद सोमवार को कर, पर्यटन, अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा, और मस्जिदों के संरक्षण के लिए भारत और मालदीव के बीच छह समझौते भी हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने व राष्ट्रपति यामीन ने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े सभी मसलों पर चर्चा की।
मोदी ने कहा, “हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी सुरक्षा प्रदाता की भूमिका को भारत समझता है और वह इस क्षेत्र में रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए तैयार है।”
उन्होंने कहा, “रक्षा के क्षेत्र में ठोस कार्ययोजना के शीघ्र क्रियान्वयन से हमारे सुरक्षा सहयोग को बल मिलेगा।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बंदरगाहों का विकास, निरंतर प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री निगरानी दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग के मूल तत्व बने रहेंगे।
उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में सीमापार आतंकवाद और कट्टरवाद से राष्ट्रपति यमीन और वह अवगत हैं।
मोदी ने कहा, “सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, मालदीव पुलिस और सुरक्षा बलों को क्षमतावान बनाना, हमारे सुरक्षा सहयोग के महत्वपूर्ण भाग हैं।”
मोदी ने कहा कि भारत के प्रस्तावित दक्षिण एशियाई उपग्रह से शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में मालदीव को फायदा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग के लिए हुए समझौते से दोनों देशों के लोगों के संबंध प्रगाढ़ होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मालदीव के साथ प्राचीन मस्जिदों के संरक्षण के लिए हुए समझौते से सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे।
मोदी ने कहा कि भारत, मालदीव का शुभ चिंतक है और उसकी विकास यात्रा में कदम से कदम मिलाकर चलेगा।
राष्ट्रपति यमीन ने अपने संबोधन में कहा कि भारत, मालदीव का महत्वपूर्ण मित्र है और हमारे संबंध सभ्यता की जड़ पर आधारित हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, “हमारी सुरक्षा भारत की सुरक्षा के साथ जुड़ी हुई है।”
इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राष्ट्रपति यमीन से मुलाकात की थी।
मालदीव के राष्ट्रपति ने इससे पहले जनवरी 2014 में भारत की द्विपक्षीय यात्रा की थी। इसके बाद मई 2014 में मोदी सरकार के शपथ-ग्रहण समारोह में भी वह शामिल हुए थे।
मालदीव के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध को हालांकि पिछले साल 50 वर्ष पूरे हो गए और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक घनिष्ठ संबंध भी हैं, लेकिन भारतीय हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल तथा निवेश के मद्देनजर उनकी यह यात्रा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नवंबर 2014 में मालदीव गई थीं। अक्टूबर 2015 में भी वह भारत-मालदीव संयुक्त आयोग वार्ता में शामिल होने के लिए मालदीव गई थीं, जो 15 वर्षो के बाद आयोजित हुई थी।
मालदीव उच्चायोग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस साल विदेश मंत्री, पर्यटन मंत्री और रक्षा मंत्री तथा विदेश सचिव के नेतृत्व में मंत्रिमंडल स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा हुआ, जिससे भारत व मालदीव के द्विपक्षीय संबंध और भी मजबूत हुए।
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