मिथिला का ‘पाग’ अब सतरंगा भी (फोटो सहित)

दरभंगा, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान ‘पाग’ अब सात रंगों में बाजार में उपलब्ध होगा। ‘पाग बचाउ अभियान’ चलाने वाली संस्था मिथिलालोक फाउंडेशन ने अब सप्ताह के सात दिनों के लिए अलग-अलग रंगों में पाग तैयार करवाया है।

दरभंगा, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान ‘पाग’ अब सात रंगों में बाजार में उपलब्ध होगा। ‘पाग बचाउ अभियान’ चलाने वाली संस्था मिथिलालोक फाउंडेशन ने अब सप्ताह के सात दिनों के लिए अलग-अलग रंगों में पाग तैयार करवाया है।

मिथिला फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ़ बीरबल झा ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया कि बिहार के दरभंगा संसदीय क्षेत्र से तीन बार प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद व पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी कीर्ति झा आजाद की मांग पर मिथिलालोक फाउंडेशन ने अपने अभियान के तहत सात रंगों में पाग का निर्माण किया है।

गौरतलब है कि इससे पहले आजाद ने सप्ताह के सभी दिनों के लिए अलग-अलग रंगों के पाग की इच्छा जाहिर की थी, ताकि वह प्रतिदिन पाग पहन कर संसद जा सकें। 16 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन को देखते हुए मिथिलालोक फाउंडेशन ने यह कदम उठाया है।

आजाद ने मिथिला के ‘पाग’ को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किए जाने की भी मांग करते हुए कहा कि इसकी उत्पति प्राचीनकाल में उस समय हुई थी, जब विभिन्न शाही परिवारों के लिए उनका विशेष ताज प्रचलन में आया।

उन्होंने कहा कि पगड़ी और टोपी के मिश्रित रूप ‘पाग’ को कालांतर में मिथिला के जन-जन अपने सिर पर धारण कर इसे अपनी पहचान मानने लगे।

आजाद ने कहा कि मिथिला में आज भी मांगलिक अवसरों पर लाल पाग पहनने का प्रचलन है। विद्वान पंडित सफेद पाग पहनते हैं। पाग कई रंगों में उपलब्ध है। जरूरत है कि सिर्फ मांगलिक अवसरों पर ही नहीं, आम दिनों में भी इसे अपनी पोशाक का हिस्सा बनाया जाए, ताकि यह प्राचीन धरोहर बची रहे।

आजाद ने मिथिलालोक को पाग बचाउ अभियान के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाने की सलाह दी है।

उल्लेखनीय है कि आजाद ने मिथिला एवं मैथिली के सांस्कृतिक उत्थान के लिए भारत की संसदीय कार्यसमिति के पटल पर इस पाग को ‘राष्ट्रीय धरोहर’ घोषित करवाने के लिए एक आवेदन दिया है।

मिथिलालोक के अध्यक्ष डॉ. बीरबल झा ने बताया कि पहले पाग का निर्माण पुराने कपड़ों से होता था, लेकिन अब इसके लिए नए कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकिशुभ अवसरों पर इसे धारण किया जा सके।

झा ने पौराणिक पाग की संरचना में मौजूद खामियों को चिह्न्ति करते हुए पाग के नए स्वरूप को अत्यंत उन्नत माना है और पाग को राष्ट्रीय पहचान दिलवाने में अपने पूर्ण सहयोग की बात कही है।

उल्लेखनीय है कि मिथिलालोक फाउंडेशन पिछले काफी दिनों से पाग बचाउ अभियान चला रहा है और इसी के तहत हाल ही में बिहार विधानसभा में कई सदस्य पहली बार पाग पहनकर सदन में उपस्थित हुए थे।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493