पार्टी के राज्य सचिव रामजी राय ने कहा, “वनाधिकार कानून के अस्तित्व में होने के बावजूद इस अंचल में वन भूमि पर लंबे समय से रह रहे आदिवासी परिवारों का चुनाव के मौके पर वन विभाग और दबंग ताकतों ने उत्पीड़न तेज कर दिया है, ताकि वे आतंकित होकर पलायन कर जाएं और वोट न डाल सकें। इसके लिए उन आदिवासी मतदाताओं को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है, जो वामपंथी दल के समर्थक हैं। इस अंचल में मतदान आठ मार्च को होना है।”
पार्टी ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिख कर कहा है, “उदाहरण के रूप में, मिर्जापुर के छानबे (सु.) विधानसभा क्षेत्र के हलिया में आदिवासी-गरीब मतदाता वन विभाग द्वारा अपने निवास से पलायन करने को मजबूर किए जा रहे हैं। वे भयमुक्त होकर मतदान न कर सकें, इसके लिए वन विभाग उन्हें आतंकित कर रहा है।”
पत्र में पार्टी ने कहा, “बीती 17 जनवरी को हलिया इलाके के वन रेंजर ने मतवार ग्राम के आदिवासी गरीबों को वन विभाग की योजनाएं बताने के बहाने मीटिंग में बुलाया। जब महिला-पुरुष निवासी रेंज ऑफिस पहुंचे तो महिलाओं को भद्दी गालियां दी गई और उन्हें लाल झंडा (कम्युनिस्ट पार्टी का) न छोड़ने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। 11 लोगों लालजी कोल, गिरजा, मुन्नीलाल, हीरामणि, मुन्नीसागर, रामजनक, मोहन, रामवृच्छ, लालता, मिश्रा (नाम) आदि को बुरी तरह से मारा पीटा गया। उनके नाजुक अंगों को सिगरेट व मोमबत्ती से दागा गया।”
राय ने कहा, “वन्य जीव अधिनियम की धाराएं फर्जी रूप से लगाकर जेल भेजा गया। हाल में पोखरा गांव के रामचंद्र गोंड को घर से उठाकर मारा-पीटा गया। इन घटनाओं की शिकायत पार्टी ने जिलाधिकारी मिर्जापुर के यहां दर्ज कराई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली और उत्पीड़न जारी है। इसी तरह इस विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों सिलहटा, बडौही, बलिहा, नदना, बेलाही, डुडिया, छमहवां आदि में गरीबों को आतंकित किया जा रहा है, जिससे गरीब परिवार पलायित हो रहे हैं।”
पार्टी ने आयोग से मतदान में आदिवासियों, गरीबों की भागीदारी सुनिश्चत कराने और भयमुक्त वातावरण में शांतिपूर्ण मतदान के लिए हर तरह के आतंक व दमन पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
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