श्रीनगर, 4 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में शोध अधिकारी के तौर पर अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी के पोते की नियुक्ति में पक्षपात से शनिवार को एक अधिकारी ने इनकार किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई गई।
अंग्रेजी समाचार-पत्र ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, गिलानी के पोते अनीस शाह के चयन में नियमों की कथित तौर पर अनदेखी की गई।
इस पर राज्य के पर्यटन विभाग के सचिव फारूक शाह ने कहा, “किसी पद के सृजन या इस प्रक्रिया में किसी प्रभाव का सवाल ही पैदा नहीं होता।”
एसकेआईसीसी एक स्वायत्त कन्वेंशन प्रमोशन सोसाइटी है, जिसे एक शोध अधिकारी के तौर पर एक अभ्यर्थी की आवश्यकता थी। इसके लिए तीन अक्टूबर, 2016 को राज्य के सूचना विभाग के जरिये उचित विज्ञापन दिया गया।
इस पद के लिए 196 उम्मीदवारों ने आवेदन दिया था, जिनमें से 35 को शॉर्टलिस्ट किया गया और इस संबंध में अधिसूचना एक नवंबर, 2016 को जारी की गई।
शाह के अनुसार, “जिन लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया था, उन्हें साक्षात्कार के लिए पांच नवंबर, 2016 को बुलाया गया था। 35 में से केवल 32 उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए पहुंचे। साक्षात्कार का आयोजन उचित चयन समिति द्वारा किया गया था, जिसका गठन एसकेआईसीसी के नियमों एवं प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया था।”
उन्होंने कहा, “अनीस शाह का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि उनकी योग्यताएं एवं अनुभव इस पद के अनुरूप थे। उनका नाम सत्यापन के लिए सीआईडी को भेजा गया, क्योंकि यह सभी चुने गए उम्मीदवारों के लिए आवश्यक होता है। सीआईडी का सत्यापन एसकेआईसीसी को प्राप्त हो गया।”
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