मुंबई, 19 जनवरी (आईएएनएस)। मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार को दुर्घटना संभावित मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को सुरक्षित बनाने के लिए आठ दिन का अल्टीमेटम दिया है। सपकाल ने चेतावनी दी है कि ऐसा न होने की स्थिति में वह आंदोलन शुरू करेंगी।
सपकाल ने मीडिया के समक्ष अपना आक्रोश प्रकट करते हुए कहा, “यह घातक एक्सप्रेसवे कई हस्तियों समेत पहले ही हजारों जिंदगियां छीन चुका है, लेकिन प्रशासन को इसकी कोई चिंता नहीं है। और कितनी जिंदगियां छीनी जाएंगी?”
सिंधुताई (69) का आक्रोश बुधवार देर रात तालेगांव इलाके में उर्सी के पास एक हादसा देखने के बाद सामने आया है, जो एक बड़ा सड़क हादसा हो सकता था लेकिन राहत की बात रही कि ऐसा हुआ नहीं।
मुंबई से पुणे जा रही सपकाल ने अपने वाहन से बाहर निकलकर घटनास्थल पर टोल टैक्स बूथ पर काम कर रहे आईआरबी एजेंसी के कर्मचारियों की अच्छी खबर ली।
सिंधुताई सपकाल ने कहा, “सरकार हमसे टोल टैक्स वसूल रही है, फिर भी एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है..आप के कुछ करने से पहले और कितने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी?”
सिंधुताई ने कहा कि अगर सरकार इस मामले में आठ दिनों के भीतर कोई कार्रवाई करने में नाकाम रही, तो वह एक्सप्रेसवे पर हजारों लोगों के साथ आंदोलन शुरू करेंगी।
एक्सप्रेसवे पर उर्सी के पास बुधवार रात को तेज गति से आ रहे एक वाहन और एक बस की टक्कर होते-होते बची। सपकाल की कार वहां टोल बूथ पर खड़ी थी।
बस में 20 महिलाएं और कई बच्चे सवार थे। राहत की बात रही कि हादसा नहीं हुआ और सभी सुरक्षित रहे।
95 किलोमीटर लंबा यशवंतराव चव्हाण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे 2002 में संचालन के लिए खोला गया था। इसके खुलने के बाद राज्य की राजधानी और पुणे के बीच की यात्रा का समय काफी घट गया।
सिंधुताई बेसहारा बच्चियों और अनाथों की सेवा के लिए पूरे देश में जानी जाती हैं। उन्हें ‘अनाथों की मां’ कह कर बुलाया जाता है। फिल्मकार अनंत महादेवन उनके जीवन पर मराठी में ‘मी सिंधुताई सपकाल’ नाम से फिल्म बना चुके हैं।
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