मुकुल पर भाजपा का दबाव था : ममता

कोलकाता, 5 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा के दबाव के चलते मुकुल राय ने उनसे अस्थायी रूप से दूरियां बनाई थीं।

विदित हो कि मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद दूसरे दर्जे के नेता और चुनाव में पार्टी की जीत का सूत्रधार माने जाते थे, लेकिन पिछले साल जनवरी में शारदा चिट फंड घोटाले के सिलसिले में सीबीआई का शिकंजा कसे जाने के बाद वह पार्टी से दूर हो गए थे।

जब ममता से एक टीवी चैनल के पत्रकार ने शुक्रवार को रॉय से विलगाव के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि मुकुल को भाजपा ने परेशान किया न कि हमलोग ने। यह सही नहीं है कि हमलोगों ने उन्हें राजनीतिक रूप से परेशान किया।

ममता ने 24 घंटा टीवी चैनल से कहा कि इसके अलावा उन्हें अलग राह चुनने का कोई कारण नहीं था। ममता ने कहा कि रॉय पर जिस तरह से मानसिक दबाव बनाया गया, उससे उन्होंने स्वयं तृणमूल से दूरी बना ली। पार्टी से उनका बड़ा मतभेद भी नहीं था।

उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने जब मुकुल को पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया तो वह पार्टी लाइन के विरुद्ध चले गए, क्योंकि सीबीआई तृणमूल पार्टी को निशाना बनाने लगी थी। पूर्व रेलमंत्री रॉय ने पार्टी की बैठकों में भी भाग लेना छोड़ दिया। इसके बाद ममता ने उनसे सारे पद छीन लिए और वह राज्यसभा में पिछली बेंच पर भेज दिए गए। इस पर अटकलें तेज हो गईं कि रॉय या तो नई पार्टी बनाना चाहते हैं या फिर अन्य पार्टियों, खास तौर से कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं।

हालांकि रॉय और ममता के रिश्ते फिर से तब सुधरने लगे, जब गत साल दिसंबर में ममता नई दिल्ली गईं और दोनों नेताओं के बीच अच्छे माहौल में बातचीत हुई। इसके बाद वह अल्पसंख्यक मामले की मंत्री से मुलाकात करने वाले तृणमूल के प्रतिनिधिमंडल में भी थे। यह इस बात का संकेत था कि रॉय तृणमूल की मुख्यधारा में लौट आए हैं।

पिछले कुछ महीनों में उनका रुतबा कुछ पहले जैसा बन गया और उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया गया है।

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