लखनऊ में शनिवार को पत्रकार वार्ता में प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका सुनीता झिंगरन ने कहा कि यश भारती सम्मान के चयन में ही नहीं, संस्कृति विभाग की कलाकारों को कार्यक्रम में बुलाने तक की प्रक्रिया गलत है। ‘यश भारती’ सम्मान में अर्जुन मिश्र, जुगल किशोर, रवि नागर, सुरेंद्र सैकिया जैसे दिवंगत कलाकारों के साथ ही शेखर जोशी जैसे मौजूदा वरिष्ठ कथाकारों व उनके योगदान तक की अनदेखी की गई है।
उन्होंने कहा कि कथक नृत्यांगना सुरभि सिंह ने कहा कि प्रदेश में कथक के दो प्रमुख घराने लखनऊ व बनारस हैं, लेकिन पं. अर्जुन मिश्र, कपिला राज सरीखे व अन्य जीवित कलाकारों उनके योगदान को किनारे कर मात्र एक रिकार्ड बनाने वाले को कथक के नाम पर यश भारती देना दिखाता है कि संस्कृति विभाग के लिए इस शास्त्रीय नृत्य की परंपरा को विश्व तक पहुंचाने और प्रचार-प्रसार करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
उत्तर प्रदेश थिएटर एंड फिल्म एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक ने कहा कि किसी भी देश-प्रदेश की संस्कृति उसकी पहचान होती है। पर निकम्मा संस्कृति विभाग संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित पुरस्कारों की न तो राशि बढ़वा सका और न दो साल तक उन्हें बंटवा ही पाया। यश भारती सम्मान के बारे में हुई कार्रवाई से लगता है कि इस मामले में भी वह सरकार और मुख्यमंत्री तक को गुमराह करता रहा है।
उन्होंने कहा कि एसोसिएशन विभाग में उसकी नियमावली, चयन प्रक्रिया और चयन समिति को लेकर आरटीआई दाखिल करने के साथ ही कला, साहित्य सम्मान और कलाकारों के मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन कर उचित कार्रवाई की मांग करेगी।
तबला-नवाज इल्मास हुसैन ने कहा कि सभी कलाकारों को सम्मान मिले, किसी से विरोध नहीं है पर यश भारती की चयन प्रक्रिया कलाकारों के साथ धोखा है।
प्रेसवार्ता में उपस्थित शास्त्रीय गायक पं. धर्मनाथ मिश्र, पं.रामेश्वर प्रसाद मिश्र, प्रो.पी.के. टंडन, हैदरबश कव्वाल और लोक कलाकार विक्रम बिष्ट ने भी एक सुर से यशभारती सम्मान की चयन प्रक्रिया को लेकर संस्कृति विभाग की भर्त्सना की।
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