रालोद प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद ने बुधवार को जारी बयान में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने दो करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष देने का वादा किया था, जिसके मुताबिक लगभग सात करोड़ लोगों को रोजगार मिल जाना चाहिए था। लेकिन वह भी एक लॉलीपॉप था, जो बेरोजगारों के सामने पेश किया गया और अब तक सात लाख लोगों को भी रोजगार देने में केंद्र सरकार विफल सिद्ध हुई है।”
उन्होंने कहा, “प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा भी प्रदेश के युवाओं को भ्रमित करने के लिए सत्तर लाख रोजगार देने का वादा किया गया है। इस घोषणा में स्रोतों की कोई जानकारी नहीं दी गई है कि यह रोजगार किस क्षेत्र में आएंगे। वास्तविकता यह है कि 160 दिन की योगी सरकार ने मुख्यमंत्री की नाक के नीचे केजीएमयू में आईटी सेक्टर के 35 लोगों को बाहर कर दिया गया है तथा एक लाख 42 हजार शिक्षामित्र सड़कों पर जीवन बिताने के लिए बाध्य हो गए हैं।”
रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा, “सत्तर लाख रोजगार की बात पूरी करने में बहुत समय भी लगेगा और पूरे होने में संदेह भी है। यदि इन शिक्षामित्रों और केजीएमयू से बाहर किए गए युवाओं के प्रति सहानुभूतिपूर्वक प्रदेश सरकार विचार करके शीघ्र निर्णय लेती है तो प्रदेश के युवाओं और बेरोजगारों में एक अच्छा संदेश जाने की संभावना है।”
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