योगी को सीएम बनाने पर केंद्र-प्रदेश सरकार से जवाब तलब

आरटीआई कार्यकर्ता संजय शर्मा ने बुधवार को आईपीएन को बताया कि उप्र के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य सांसद हैं। ऐसे में भाजपा को उप्र विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी सांसदों को मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या भाजपा का एक भी विधायक ऐसा नहीं था जो मुख्यमंत्री बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि देश के संविधान में कोई व्यक्ति दो लाभ के पद पर नहीं रह सकता। ऐसे मंे सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद की सभी सुविधाएं ले रहे हैं और बतौर सांसद भी सुविधाएं ले रहे हैं।

संजय शर्मा ने कहा कि योगी और केशव को मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बनने के बाद सांसद पद से इस्तीफा देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऐसा केवल आगामी राष्ट्रपति चुनाव में वोट करने के उद्देश्य से किया गया है। शर्मा ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट से मांग की है कि सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव मौर्य के राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने पर रोक लगा दी जाए। उन्होंने कहा कि हमने पूरे मामले पर हाईकोर्ट से निर्देश भी मांगा है।

शर्मा ने बताया, “मेरे अधिवक्ता चन्द्र भूषण पाण्डेय ने बीते 11 मई को उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की गई थी। न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल और वीरेंद्र कुमार ने भारत के अटॉर्नी जनरल की ओर से आए भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अशोक सिंह मेहता, उप्र के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह और मेरे अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय को सुनने के बाद अटॉर्नी जनरल और यूपी के एडवोकेट जनरल को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। इसके बाद रिजॉइंडर दाखिल करने के लिए मुझे दो हफ्ते का समय देते हुए इसके बाद सुनवाई करने का आदेश दिया है।

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