जयपुर, 10 मई (आईएएनएस)। राजस्थान में वन्यजीव अभयारण्य भी पानी की कमी की मार झेल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे परेशान पशु मानव बस्तियों की ओर रुख करने के लिए मजबूर हैं।
राज्य में पीपुल फॉर एनिमल (पीएफए) के प्रमुख बाबूलाल जाजु ने आईएएनएस को बताया, “हमारे अनुमानों के अनुसार, वन्यजीव अभयारण्यों में पिछले डेढ़ साल में करीब 150 तेंदुए पानी और भोजन की कमी के कारण अपना जीवन खो चुके हैं। अगले दो माह में यह स्थिति और भी गंभीर होने वाली है।”
पानी की कमी की मार झेल रहे पशु गांवों की ओर रुख करने के लिए मजबूर हैं।
राजस्थान में दो बाघ परियोजनाएं, एक पक्षी अभयारण्य और 25 से अधिक वन्यजीव अभयारण्य हैं।
वन विभाग का दावा है कि वह टैंकरों और नलकूपों के जरिए वन्यजीव अभयारण्यों में पानी की आपूर्ति के लिए 77 लाख रुपये खर्च कर रहा है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रयास अपर्याप्त है।
बाबूलाल ने कहा, “77 लाख रुपये कुछ भी नहीं है। यह जरूरत का केवल एक अंश है। पशुओं को केवल पीने के लिए ही नहीं, बल्कि नहाने और खेलने के लिए भी पानी की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा, “हर वर्ष ग्रीष्म ऋतु में यह समस्या होती है। राज्य सरकार को इसका स्थायी रूप से समाधान खोजना चाहिए ताकी वन्यजीवों को इसका सामना न करना पड़े।”
बाबूलाल ने कहा कि तापमान बढ़ने के कारण कई जलाशय सूख गए हैं और कई अन्य सूखने की कगार पर हैं।
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