नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु सरकार की उस याचिका की जांच कर रही है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए लोगों की रिहाई की मांग की गई है।
राजनाथ ने लोकसभा में कहा, “बुधवार को हमें पत्र मिला है, जिसकी हम जांच कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर पहले ही अपना फैसला दे दिया है। अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का पालन करना सरकार की संवैधानिक व नैतिक जिम्मेदारी है।”
इससे पहले कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार से तमिलनाडु सरकार के पत्र पर विचार नहीं करने की अपील की थी।
उन्होंने कहा, “पत्र पर बिल्कुल भी विचार नहीं किया जाना चाहिए। देश की अखंडता को बनाए रखने के लिए हत्यारों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि ‘राजीव जी ने देश की अखंडता के लिए ही अपने प्राणों की आहूति दे दी।’
राजीव गांधी की हत्या में शामिल सभी सात दोषी जेल में बंद हैं, जिनकी रिहाई पर बुधवार को तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया मांगी।
केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि को लिखे एक पत्र में तमिलनाडु के मुख्य सचिव के.ग्नानादेसिकन ने कहा कि राज्य सरकार को सातों दोषियों का आवेदन मिला है, जिसमें उन्होंने इस आधार पर रिहाई का आग्रह किया है कि वे जेल में 24 साल बिता चुके हैं।
सातों दोषियों में वी.श्रीहरन उर्फ मुरुगन, टी.सुतेंद्रराजा उर्फ संथान, ए.जी.पेरारिवलन, जयकुमार, रॉबर्ट पायस, रविचंद्रन व मुरुगन की पत्नी नलिनी श्रीहरन हैं।
सातों दोषी सन् 1991 से ही जेल में बंद हैं। इसी साल एक महिला तमिल टाइगर कार्यकर्ता ने चेन्नई के निकट एक चुनावी रैली के दौरान फिदायीन हमला कर राजीव गांधी की हत्या कर दी थी।
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