नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के भाजपा विधायक की एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की गई थी कि क्या वह राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में मतदान कर सकता है।
विधायक राजेंद्र मेश्राम मध्य प्रदेश विधानसभा में सिंगरौली जिले के देवसार से चुने गए लेकिन उनके चुनाव को पिछले वर्ष मार्च में उच्च न्यायालय ने अमान्य कर दिया था। वह जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर पाए थे और मतदाता सूची की प्रमाणित प्रति पेश करने में नाकाम रहे थे।
न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष एवं अमिताव राय की अवकाश पीठ ने कहा कि उन्हें इस बारे में तब स्पष्ट करने की मांग करनी चाहिए थी जब वह राज्य के विधानसभा में अपने निर्वाचन को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अमान्य करार देने के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2015 में दिए गए आदेश के जरिए मेश्राम को विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने की इजाजत तो दे दी थी लेकिन मतदान में भाग लेने पर रोक लगा दी थी।
गत छह जून को जब विधानसभा सचिवालय ने मेश्राम को यह सूचित किया कि वह दो साल पर होने वाले राज्यसभा के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते तब वह सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे थे।
अवकाश पीठ ने स्पष्ट किया कि यह कोई स्पष्टीकरण कर मुद्दा नहीं है क्योंकि उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उनकी अपील की एक अन्य पीठ सुनवाई कर रही है।
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