अगरतला/आइजोल, 5 जून (आईएएनएस)। केंद्र और दो राज्य सरकारों के अधिकारियों ने रियांग जनजातियों को वापस मिजोरम में उनके घर लौटने को राजी करने के लिए शनिवार को उनसे मुलाकात की।
रियांग जनजाति समुदाय के लोग उत्तरी त्रिपुरा जिले में विगत 19 वर्षो से शरण लिए हुए हैं।
शरणार्थियों के प्रत्यावर्तन के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और मिजोरम सरकार की ओर से विस्थापित रियांग जनजाति के शरणार्थियोंे के पुनर्वास की योजना से संबंधित केंद्र के पास भेजे गए एक प्रस्ताव के आलोक में उत्तरी त्रिपुरा जिले के कंचनपुर में बैठक हुई।
केंद्रीय गृह मंत्रालय मंत्रालय में संयुक्त सचिव और पूर्वोत्तर के प्रभारी सत्येंद्र गर्ग शुक्रवार को अगरतला पहुंचे। उन्होंने जनजाति शरणार्थियों से अपने घर मिजोरम वापस जाने और वहां एक सामान्य जीवन बिताने को कहा।
गर्ग ने अगरतला में संवाददाताओं से कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने जनजाति शरणार्थियों को मिजोरम में उनके घर वापस भेजने के लिए केंद्र सरकार, त्रिपुरा और मिजोरम सरकार से मिलकर काम करने को कहा है।
बैठक में मिजोरम सरकार के प्रमुख गृह सचिव रेणु शर्मा, गृह विभाग के अन्य अधिकारियों और मामित जिले के उपायुक्त लालबिआकसांगी ने भाग लिया।
त्रिपुरा सरकार की ओर से उत्तरी त्रिपुरा जिले के जिला अधिकारी संदीप महातामे, पुलिस अधीक्षक मानिक लाल दास और कंचनपुर के अनुमंडल मजिस्ट्रेट नंतू रंजन दास ने भाग लिया।
मिजोरम से सटे कंचनपुर इलाके में उत्तरी त्रिपुरा जिले के अस्थाई शिविरों में करीब 31,300 रियांग जनजाति समुदाय के लोग 1997 से रहते हैं। ये लोग अपने को ‘ब्रू’ कहते हैं।
पश्चिमी मिजोरम में एक मिजो वन अधिकारी की हत्या होने के कारण हुई जातीय हिंसा के बाद ये लोग भाग कर यहां आए थे।
हालांकि मिजोरम सरकार ने इन्हें वापस लाने के कई बार प्रयास किए। लेकिन भोजन और सुरक्षा की मांगें पूरी होने तक ये लोग वापस जाने को तैयार नहीं हैं।
मिजोरम के अतिरिक्त गृह सचिव लाबिआकजामा ने आइजोल में कहा कि राज्य सरकार ने गत महीने जनजातियों को वापस लेने की एक विस्तृत योजना केंद्र सरकार के पास भेजी थी।
उन्होंने कहा, “केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा ‘रोडमैप’ स्वीकृत किए जाने के बाद रियांग शरणार्थियों को मिजोरम में उनके घर वापस लाने की नई पहल की जाएगी।”
लालबियाकजामा ने कहा कि शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए मिजोरम ने केंद्र से 68 करोड़ रुपये की मांग की है।
इस बीच गत माह त्रिपुरा के कंचनपुर इलाके में एक रियांग शरणार्थी भृगुराम रियांग की पीट पीट कर हत्या के बाद हिंसा हुई थी जिसमें जनजातीय शरणार्थियों ने स्थानीय लोगों के करीब 22 घर जला दिए थे।
सामाजिक-आर्थिक और कानून एवं व्यवस्था की उत्पन्न हो रही समस्याओं को लेकर त्रिपुरा सरकार जनजातीय शरणार्थियों के प्रत्यावर्तन के लिए केंद्र और मिजोरम सरकार से कह रही है।
dharmpath.com dharmpath