बाघ की खोजबीन के लिए लखनऊ, हरदोई तथा सीतापुर जनपद में वन विभाग की टीमें अपने-अपने क्षेत्र में प्रयास कर रही हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि बाघ अपने स्थान से किसी न किसी दिशा में 20 से 30 किमी की दूरी तय कर चुका होगा।
हरदोई जनपद में कछौना के निकट जनगांव में 27 नवम्बर को ग्रामीणों ने दिन में बाघ को देखा। ग्रामीणों ने वन विभाग को बाघ देखे जाने की जानकरी दी तो वन प्रशासन ने उसे अफवाह माना। 27 की रात में ही बाघ ने जनगांव में एक बैल का शिकार करके उसे खेत में ले जाकर खाया। सुबह बैल का अधखाया शव मिलने पर गांव में हड़कम्प मच गया।
वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर पद चिह्नें की जांच करके घोषणा की कि बैल का शिकार करने वाला जानवर बाघ ही है। 28 की रात में बाघ ने फिर से खेत में आकर बैल को खाया। वन व पुलिस कर्मियों को रात में दोबारा बाघ आने की जानकारी दूसरे दिन ही हो पायी। 29 नवम्बर को लखनऊ की सीमा से 12 किमी दूर जलालपुर में ग्रामीणों ने बाघ को देखा।
वन विभाग की टीम ने पद चिह्नें की जांच के बाद कहा कि पद चिह्न् बाघ के हैं। बाघ की मौजूदगी से हरदोई के साथ माल क्षेत्र की सीमा से सटे गांवों में दहशत है। हरदोई का जलालपुर गांव लखनऊ जनपद की सीमा से मात्र 15 किमी दूर है। इसलिए प्रबल आशंका है कि गोमती का किनारा पकड़कर बाघ लखनऊ या सीतापुर जिले में कभी भी प्रवेश कर सकता है।
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