नई दिल्ली, 9 सितम्बर (आईएएनएस)। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को यहां कहा कि अब समय आ गया है कि आकादमिक पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों का प्रमाणीकरण भी डिजीटल स्तर पर किया जाए। उन्होंने हितधारकों से आग्रह किया कि राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी अगले साल तक लागू करने का लक्ष्य निर्धारित करें।
राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) के संबंध में जागरूकता के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्धाटन अवसर पर प्रकाश जावड़ेकर ने सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले सभी भागीदारों से आग्रह किया कि वे एनएडी का उपयोग शुरू करने का लक्ष्य 2017 तक पूरा कर लें। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के कारण जीवन में तेजी से परिवर्तन हो रहा है।
जावड़ेकर ने कहा कि खरीदारी, रेलवे टिकट बुकिंग, बैंकिग और मोबाइल रिचार्ज जैसे क्षेत्रों में भी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह हम समाज में आमूल बदलाव देख रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि वित्तीय प्रतिभूतियों को डी-मैट की प्रक्रिया बहुत पहले से शुरू हो चुकी है और इस तरह निवेशकों की वित्तीय स्थिति सुरक्षित हुई है। इस प्रणाली को अब शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आकादमिक पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों का प्रमाणीकरण भी डिजीटल स्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि संस्थानों को एनएडी प्रौद्योगिकी को अपनाकर उसे वास्तविकता में बदलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एनएडी पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों का प्रमाणीकरण करेगी और उनके सुरक्षित संग्रह को सुनिश्चत करेगी। अकादमिक पुरस्कारों और प्रमाणपत्रों को डिजिटल संग्रह में रखने से शिक्षा संस्थानों, छात्रों और रोजगार प्रदाताओं को ऑनलाइन प्रमाणपत्र आदि जांचने की सुविधा होगी। इसके साथ ही धोखाधड़ी तथा जाली दस्तावेजों से छुटकारा मिलेगा। सभी हितधारकों को एनएडी की ऑनलाइन सुविधा 24 घंटे प्राप्त होगी।
मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि इस कदम से 21वीं सदी में नया अध्याय खुलेगा। एनएडी प्रणाली पर एक प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।
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