नई दिल्ली, 1 दिसम्बर (आईएएनएस)। धनशोधन के मामले में आरोपी कथित हवाला डीलर मोहम्मद असलम वानी की जमानत याचिका पर यहां एक अदालत ने आदेश को सुरक्षित रख लिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि अदालत 4 दिसंबर को आदेश सुनाएगी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत याचिका का विरोध किया है।
वानी के वकील एम.एस. खान ने ‘बदली हुई परिस्थितियों’ में जमानत मांगते हुए कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 को असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है।
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते पीएमएलए की धारा 45 को रद्द कर दूसरे अपराधों पर लागू प्रावधानों के मुताबिक आरोपी को जमानत देने का रास्ता साफ किया गया है।
लोक अभियोजक नवीन कुमार मत्ता और राजीव अवस्थी ने कहा कि पीएमएलए धारा 45 को असंवैधानिक घोषित किए जाने से सभी को जमानत का अधिकार नहीं मिल गया है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि धनशोधन में शामिल अभियुक्त की जमानत याचिका पर निर्णय करते समय अपराधों की प्रकृति को देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वानी के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
ईडी ने सितंबर में वानी और कश्मीरी अलगाववादी नेता शबीर शाह के खिलाफ पीएमएलए के प्रावधानों के तहत आरोपपत्र दायर किया था।
वानी को 6 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कथित तौर पर यह स्वीकार किया था कि उन्होंने शब्बीर शाह को हवाला के जरिए 2.25 करोड़ रुपये दिए थे।
शाह को 2005 के एक धनशोधन मामले में 25 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस के विशेष सेल ने वानी को गिरफ्तार किया था।
उनके बचाव वकील ने अदालत से कहा कि स्पेशल सेल द्वारा 2005 में दर्ज किए गए मामले में, अदालत ने सह-आरोपी वानी को आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था।
ईडी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पीएमएलए के तहत कार्रवाई करने के लिए शस्त्र अधिनियम एक सक्रिय बिंदु है। दोनों आरोपियों ने आरोपों का खंडन किया है।
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