न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति अताउर रहमान मसूदी की खंडपीठ ने संस्था की अधिवक्ता डॉ. नूतन ठाकुर की दलील सुनने के बाद आदेश दिया कि जो तथ्य याचिका में दर्शाए गए हैं, वे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना प्रतीत होते हैं। इसलिए याची के लिए उचित होगा कि वह सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करें।
नूतन के अनुसार, याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई, 2015 को आदेशित किया था कि किसी भी सरकारी विज्ञापन में केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की फोटो छप सकती है, जिसे 18 मार्च, 2016 को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री और उनकी अनुपस्थिति में मंत्री की फोटो छपाने की अनुमति दी गई थी।
यूपी में इसके विपरीत पिछले एक महीने से सरकारी विज्ञापनों में मुलायम सिंह की फोटो छप रही है, कहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके कैबिनेट मंत्री शिवपाल की एक साथ फोटो छप रही है। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना तत्काल रोके जाने और अवहेलना करने वालों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गसा था।
dharmpath.com dharmpath