नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए विशेष श्रेणियों के मतदाताओं के लिए कई पहल की है।
आयोग ने यह निर्देश दिया है कि जिन बस्तियों में कमजोर वर्ग के लोगों की संख्या ज्यादा है उनकी पहचान की जाए और ऐसे स्थानों पर मतदाताओं की संख्या की परवाह किए बिना मतदान केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि कमजोर वर्ग के मतदाताओं को ऐसे क्षेत्र में न जाना पड़े जहां उन्हें मतदान करने से रोका जा सकता हो।
यह भी कहा गया है कि किसी निर्वाचन क्षेत्र में अगर कुष्ठ रोगी रहते हों तो आरोग्य निवास (सैनटोरियम) में रहने वाले सभी कुष्ठ रोगियों के लिए अलग से एक मतदान केंद्र स्थापित किया जाए और उस सैनटोरियम में काम करने वाले अधिकारियों, डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को ऐसे मतदान केंद्र के पीठासीन और मतदान अधिकारी बनाया जाए।
यह भी कहा गया है कि ऐसे क्षेत्रों में जहां महिलाएं सामाजिक प्रक्रिया या प्रथा के कारण पुरुषों के साथ घुलने मिलने में सकुचाती हों तो उन क्षेत्रों में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग मतदान केंद्र स्थापित किए जाएं या महिलाओं-पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइनें बनाई जाएं।
आयोग ने इतना ही नहीं वृद्धजनों, अशक्त व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं के लिए मतदान केंद्रों में विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने को भी कहा है।
यह भी निर्देश दिया गया है कि मतदान केंद्रों में प्रवेश के लिए दिव्यांग मतदाताओं को पंक्ति में प्रतीक्षा कराए बिना ही मतदान की सुविधा दी जाए। जरूरत पड़ने पर मतदान केंद्रों में व्हीलचेयर की सुविधा देने के साथ-साथ ऐसे स्थानों पर अस्थायी रैंप उपलब्ध कराए जाएं जहां स्थायी रैंप उपलब्ध नहीं हैं। इन उपायों से निर्वाचन आयोग ने समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और अनुकूल वातावरण में अपना मतदान करने के लिए हर मतदाता को अवसर प्रदान किया है।
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