नई दिल्ली, 2 दिसम्बर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की उस याचिका को एक अदालत ने बुधवार को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे थे। सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है।
विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार ने सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ शुरुआती जांच का पूरा रिकार्ड मांगा गया था। इसी जांच के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सिह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
अदालत ने कहा, “शुरुआती जांच सिर्फ यह जानने के लिए की गई थी कि यह मामला नियमित जांच के लिए दर्ज किए जाने के योग्य है या नहीं?”
अदालत ने कहा, “प्राथमिकी जांच का प्रारंभ बिंदु है। अगर किसी दस्तावेज या संलग्नक को इसका हिस्सा नहीं बनाया गया है तो उसकी प्रति आरोपी को दिए जाने की कोई जरूरत नहीं है।”
अपनी याचिका में वीरभद्र सिंह ने कहा था कि सीबीआई ने उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की प्रति नहीं दी है।
दूसरी ओर, सीबीआई ने एक सीलबंद लिफाफे में संपूर्ण दस्तावेज अदालत को सौंप दिए हैं।
वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी पर आरोप है कि सिंह के केंद्रीय इस्पात मंत्री रहने के दौरान इनके पास इतनी संपत्ति आ गई थी जो सिंह की आय के ज्ञात स्रोत से अधिक थी।
वीरभद्र, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और सहयोगी चुन्नीलाल के खिलाफ 23 सितंबर को भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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