नई दिल्ली, 7 सितम्बर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को जीवन बीमा निगम के एक अभिकर्ता आनंद चौहान के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लिया।
विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार ने आरोपी एलआईसी अभिकर्ता को आरोप पत्र और अन्य दस्तावेजों की प्रति मुहैया कराने के भी निर्देश दिए और मामले की अगली सुनवाई की तिथि 26 सितम्बर तय कर दी।
ईडी ने चौहान के खिलाफ मंगलवार को आरोप पत्र दायर किया था।
ईडी ने अदालत से कहा कि वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी की भूमिका के संबंध में आगे की जांच जारी है और बाद में एक पूरक आरोप पत्र दायर किया जा सकता है।
ईडी ने अपने आरोप पत्र में कहा कि चौहान वीरभद्र सिंह के काले धन की 5.14 करोड़ रुपये की राशि को जीवन बीमा निगम की पॉलिसी खरीदने में निवेश करने का दोषी है। वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और उनके अन्य परिजनों के नाम से पॉलिसी खरीदी गई थी।
ईडी ने गत आठ जुलाई को धन शोधन निरोधक अधिनियम के तहत चौहान को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ धनशोधन मामले में ईडी ने यह पहली गिरफ्तारी की है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी मामले की जांच कर रहा है।
जांच में पाया गया है कि वीरभद्र सिंह ने साल 2009 से 2011 के बीच केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए अपने नाम और अपने परिजनों के नाम से 6.03 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति अर्जित की, जो उनकी आय के ज्ञात
स्रोतों से अधिक है।
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