इंफाल, 9 अगस्त (आईएएनएस)। राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने मंगलवार को यहां सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) के खिलाफ अपना 16 साल पुराना अनशन तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वह मणिपुर की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं, ताकि राज्य से एएफएसपीए खत्म हो सके।
इंफाल, 9 अगस्त (आईएएनएस)। राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने मंगलवार को यहां सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) के खिलाफ अपना 16 साल पुराना अनशन तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वह मणिपुर की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं, ताकि राज्य से एएफएसपीए खत्म हो सके।
पहले शर्मिला (42) ने इंफाल पश्चिम में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एल.टोनसिंग के समक्ष कहा था कि वह मंगलवार को अपना अनशन तोड़ देंगी।
बाद में 10,000 रुपये का बांड भरने के बाद अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। बांड भरने के बाद अदालत ने उन्हें मीडिया से बातचीत करने की इजाजत दे दी।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वह मणिपुर की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं। 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में वह खुराई क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगी।
खबरों के मुताबिक, कुछ स्थानीय और राष्ट्रीय पार्टियों ने उनसे संपर्क किया है, लेकिन उन्होंने अभी तक किसी को जवाब नहीं दिया है।
शर्मिला ने कहा कि उन्हें अनजान प्राणी के रूप में देखा गया है।
बहरहाल डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत ठोस भोज्य पदार्थ खाने की अनुमति नहीं दी है। एक डॉक्टर ने कहा, “चूंकि वह करीब 16 साल से ठोस भोजन से दूर रही हैं, हमें एक के बाद एक वाला तरीका अपनाना है। उनको सामान्य भोजन दिए जाने में अभी समय लगेगा।”
आधिकारिक रूप से घोषणा की गई थी कि अगले तीन दिनों तक वह डाक्टरों की निगरानी में रहेंगी। इस दौरान उन्हें धीरे-धीरे ठोस भोजन दिया जाएगा और उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जाएगी।
शर्मिला के बड़े भाई आई.सिंघजीत ने एक खुलापत्र लिखकर उनसे अनशन जारी रखने की एक मार्मिक अपील की थी। उनकी मां ने भी उनसे मिलने से इनकार कर दिया। सिंघजीत कहते हैं, “शर्मिला कुछ बाहरी शक्तियों के प्रभाव में आ गईं।”
सुरक्षा बलों के हाथों 10 आम नागरिकों की मौत के विरोध में 16 साल पहले 4 नवंबर, 2000 को शर्मिला ने अनशन शुरू किया था।
मणिपुर सरकार ने उन्हें उसी साल आत्महत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था।
हालांकि उन्होंने हमेशा यह कहते हुए खुद पर लगे इस आरोप का खंडन किया कि वह अनशन को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं।
अभियोजन पक्ष जब आरोप साबित करने में विफल हो गया, तब मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने 29 फरवरी, 2016 को उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था। लेकिन उनके फिर से अनशन पर बैठ जाने के कारण उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया था।
शर्मिला हर क्षेत्र के लोगों से समर्थन की मांग करती रही हैं, लेकिन कुछ पत्रकारों को छोड़कर किसी ने उनसे मुलाकात नहीं की। इस दौरान वह हर 15 दिन पर अदालत में पेशी के लिए जाती रहीं।
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