गुड़गांव/दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। रियल स्टेट डेवलपर वाटिका समूह के प्रबंध निदेशक और तीन अन्य के खिलाफ ठगी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के कुछ दिन बाद समूह के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उन्हें एक झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।
गुड़गांव/दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। रियल स्टेट डेवलपर वाटिका समूह के प्रबंध निदेशक और तीन अन्य के खिलाफ ठगी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के कुछ दिन बाद समूह के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उन्हें एक झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।
समूह के प्रबंध निदेशक गौतम भल्ला, निदेशक अनिल भल्ला और गौरव भल्ला और कंपनी के बिक्री व ग्राहक सेवा प्रमुख अंकित नागपाल के खिलाफ दिल्ली के संतपुरा निवासी प्रीत कौर और उनके पति सुरेंद्र पाल सिंह ने 7 सितंबर को मामला दर्ज कराया था।
यह एफआईआर गुड़गांव के सेक्टर 20 पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (अमानत में खयानत) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज की गई है।
दोनों शिकायतकर्ताओं ने एफआईआर में कहा कि उन्होंने वाटिका वन एक्सप्रेस सिटी में जुलाई 2014 में फ्लैट बुक कराया था और करीब 22 लाख रुपये का किस्तों में भुगतान किया। हालांकि जब दिसंबर 2015 में उन्होंने साइट का दौरा किया, तो वहां केवल खाली जमीन पड़ी थी।
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि इसके बाद उन्होंने बिल्डर से अपने पैसे वापस मंगे। लेकिन कंपनी के एक अधिकारी नागपाल ने उन्हें बताया कि यह परियोजना रद्द हो गई है, इसलिए वे अपना पैसा नई परियोजना में स्थानांतरित कर दें, उन्हें आसानी से पैसा वापस कर दिया जाएगा।
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने अपने पैसे नई वाटिका सेवल एलीमेंट्स में स्थानांतरित कर दिए, लेकिन इसके बाद भी उन्हें उनका पैसा नहीं मिला।
हालांकि वाटिका के अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ताओं ने कौर द्वारा मार्च 2016 में दिए गए ‘अंडरटेकिंग’ का उल्लेख नहीं किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें 21.54 लाख रुपये वापस मिल गए हैं, जिसे वे अपनी मर्जी से वाटिका सेवन एलीमेंट्स में फ्लैट बुक करने के लिए डाल रही हैं। कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा, “यह परियोजना समय पर है और डिलीवरी भी समय पर कर दी जाएगी।”
आईएएनएस की एक पहले की रिपोर्ट में एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया था कि शिकायतकर्ता (कौर) ने अपने पैसों को वाटिका समूह के ‘वापसी के आश्वासन’ योजना के तहत निवेश किया था। यह गलत है, क्योंकि पैसों को वाटिका वन एक्सप्रेस सिटी एक आवासीय परियोजना में लगाया गया था।
कौर के पति सुरिंद्र पाल सिंह से संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा कि जिस संपत्ति को बेचने का दावा किया गया था और जो संपत्ति उन्हें दी जा रही है, उसमें ‘बहुत बड़ा अंतर है।’
सिंह ने आईएएनएस को बताया, “मैंने अपनी किस्त हमेशा समय पर जमा करवाई। लेकिन एक साल मुझे बताया गया कि परियोजना (वाटिका वन एक्सप्रेस सिटी) रद्द कर दी गई है और कोई पैसे वापस नहीं मिलेंगे। मैं उन्हें लगातार पैसे वापस करने के लिए कहता रहा, लेकिन उन्होंने कोई जबाव नहीं दिया।”
सिंह ने कहा कि उसके बाद कंपनी की तरफ से नागपाल (एफआईआर में दर्ज आरोपियों में से एक) ने उन्हें और उनकी पत्नी पर दबाव डाला कि वे वाटिका समूह की दूसरी प्रॉपर्टी सेवन एलीमेंट्स खरीद लें, क्योंकि पैसे की वापसी संभव नहीं है और पिछली परियोजना रद्द हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी मूल प्रॉपर्टी के बदले जो प्रॉपर्टी दी जा रही है, वह गुड़गांव के अंदरूनी इलाके में है, जबकि उन्होंने जो प्रॉपर्टी खरीदी थी, वह द्वारका एक्सप्रेसवे पर स्थित था। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे लगातार पैसे वापस लौटाने की विनती की, लेकिन उन्होंने तरस नहीं खाई और लगातार झूठ बोलते रहे।”
वाटिका समूह के सीआरएम हेड विकास मनहास ने गौर द्वारा दूसरी संपत्ति को खरीदने के वक्त दिए गए अंडरटेकिंग के हवाले से कहा, “मैं निश्चिंत हूं कि पुलिस अपनी जांच के दौरान सच का पता लगा लेगी।”
वाटिका समूह के अध्यक्ष विनित तैंग, जिन्हें एफआईआर में आरोपी बनाया गया है, ने कौर और उनके पति पर ‘पुलिस के समक्ष तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत करने’ का आरोप लगाया और कहा, “अभी या बाद में सच्चाई सामने आ जाएगी, वे हमारे समूह की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रही हैं।”
पुलिस अधिकारी कंवर सिंह ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह मामला पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा जांच के बाद दर्ज किया गया।
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