ग्वालियर, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। करीने से बनाए गए सफेद बाल और उसी से ‘मैच’ करती सफेद धोती पहने एक 100 वर्षीय शख्स यहां तानसेन संगीत महोत्सव में तन्मयता से संगीत सुनते हुए ‘सुर’, ‘ताल’ और ‘राग’ के बीच सुकून महसूस करते हैं। यह 93 साल से आयोजित हो रहे इस महोत्सव के प्रति संगीत प्रेमियों के लगाव को दर्शाता है, जो मुगल सम्राट अकबर के दरबार के दिग्गज संगीतकार (तानसेन) के सम्मान में आयोजित होता है।
ग्वालियर, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। करीने से बनाए गए सफेद बाल और उसी से ‘मैच’ करती सफेद धोती पहने एक 100 वर्षीय शख्स यहां तानसेन संगीत महोत्सव में तन्मयता से संगीत सुनते हुए ‘सुर’, ‘ताल’ और ‘राग’ के बीच सुकून महसूस करते हैं। यह 93 साल से आयोजित हो रहे इस महोत्सव के प्रति संगीत प्रेमियों के लगाव को दर्शाता है, जो मुगल सम्राट अकबर के दरबार के दिग्गज संगीतकार (तानसेन) के सम्मान में आयोजित होता है।
100 वर्षीय वीरेंद्र सिंह राजावत ने यहां आईएएनएस को बताया, “मैं शायद हमेशा से इस महोत्सव में आता रहा हूं।”
उन्होंने कहा, “तानसेन जैसे महान कलाकार की मातृभूमि से ताल्लुक होने के चलते आप संगीत कैसे नहीं सुन सकते हैं और कैसे इस बारे में अनभिज्ञ रह सकते हैं? जमीनी स्तर पर लगभग हर घर के बच्चे संगीत सीख रहे हैं। हमें इस पर बेहद गर्व है। संगीत हमारी रगों में दौड़ता है।”
एक आयोजक ने कहा कि बांसुरी वादक चेतन जोशी और ईरानी टोम्बक और डफली बजा रहे फखरुद्दीन गफरी जैसे कलाकारों के मंच के पास बैठा ‘पांच वर्षीय लड़का तानसेन जैसा महान बनने के लिए संगीत का प्रशिक्षण ले रहा है क्योंकि वह अपने माता-पिता को गर्व महसूस कराना चाहता है।’
कुछ उत्साही श्रोतागण कार्यक्रम स्थल पर सुबह 10 बजे पहुंचते हैं जहां तानसेन और उनके सूफी गुरु शेख मुहम्मद गौस का मकबरा है, जबकि कुछ शाम को अपने काम और घरेलू कार्यो को निपटाने के बाद आते हैं। वे अपने बच्चों और जीनवनसाथी के साथ आते हैं और देर रात दो बजे तक भी रुकते हैं।
महोत्सव के संरक्षकों का मानना है कि संगीत से सीधे रूबरू होने का यह अनुभव बच्चों व युवाओं को सीखने का मौका मुहैया कराता है।
एक संरक्षक को अपनी नन्ही बेटी को ‘तीन ताल’ सिखाते देखा गया। उन्होंने कहा, “हम अपनी बेटी को यहां पिछले तीन सालों से लेकर आ रहे हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि वह अपनी जड़ों को समझे।”
तानसेन समारोह गुजरी किला, तानसेन के समाधि स्थल और बेहत गांव सहित विभिन्न कार्यक्रम स्थलों पर आयोजित होता है। बेहत तानसेन का जन्मस्थल है।
गांव के मुखिया अरविंद सिंह ने आईएएनएस को बताया, “समारोह स्थलों में से एक बनने के लिए बेहत का शुक्रिया, जहां संगीत महोत्सव हो रहा है। बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं। महोत्सव में हमारे गांव के कुछ बच्चे भी प्रतिभागी के रूप में शामिल हैं। करीब 15 बच्चे इस महोत्सव का हिस्सा हैं, वे सभी कोलकाता के रहने वाले एक गुरु से यहीं गांव में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।”
उनके पास राज्य सरकार के लिए एक सुझाव भी है। उन्होंने कहा कि संगीत महोत्सव का आगाज या समापन यहां (बेहत) से होना चाहिए। उन्होंने गांव में कम सत्र आयोजित होने का हवाला देते हुए सवालिया लहजे में कहा कि इस जगह तानसेन का जन्म हुआ था तो फिर इसे कम महत्व क्यों दिया जाता है?
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