संसदीय समिति ने ‘पुराने सैन्य उपकरणों’ पर जवाब मांगा

नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। संसद की एक समिति ने भारतीय सेना के ‘बड़े पैमाने पर पुराने हथियारों’ को लेकर चिंता जताई और सेना के आधुनिकीकरण में सुस्ती पर सरकार की खिंचाई की है।

नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। संसद की एक समिति ने भारतीय सेना के ‘बड़े पैमाने पर पुराने हथियारों’ को लेकर चिंता जताई और सेना के आधुनिकीकरण में सुस्ती पर सरकार की खिंचाई की है।

रक्षा संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मेजर जनरल बी. सी. खंडूरी (सेवानिवृत्त) ने संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत की गई रपट में कहा, “यह समिति चिंतित है कि हमारी सेनाएं बड़े पर पुराने उपकरणों के साथ काम कर रही है।”

इस समिति में दोनों ही सदनों के सदस्य शामिल हैं। इसकी रपट में कहा गया, “इसके अलावा गाड़ियों, छोटे हथियारों, तोपखाने के हथियारों, निगरानी उपकरणों, सिगनल और कम्युनिकेशन उपकरणों, राडार और बिजली के उपकरणों और जनरेटर आदि की काफी कमी है।”

सरकार ने रक्षा तैयारियों को लेकर समिति द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में कहा, “आदर्श रूप में अत्याधुनिक मौजूदा और पुराने हथियार और उपकरण 30:40:30 के अनुपात में होने चाहिए और इसे प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।”

सरकार ने कहा, “सेनाओं का आधुनिकीकरण और क्षमता विकास एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, जोकि संचालन आवश्यकताओं और खतरे के स्तर पर आधारित होती है।”

समिति ने इस जबाव को ‘नौकरशाही की प्रकृति’ का जवाब करार दिया है और कहा है कि इसमें ‘कोई कार्रवाई जो की गई है या जिसका प्रस्ताव है’ के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए समिति इस जवाब से संतुष्ट नहीं है।

समिति ने कहा कि वह इस जवाब से लगता है कि यह नियमित किस्म की प्रतिक्रिया है और ऐसा लगता है कि मंत्रालय ने सूचनाओं को छुपाने की कोशिश की है।

सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए समिति ने कहा कि सैन्यकर्मियों की संख्या में वृद्धि, आधुनिक और परंपरागत हथियारों के सही मात्रा में खरीद, गोला-बारूद और बुनियादी ढांचे के विकास आदि चिरस्थाई समस्या है और उन्हें हल करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई शुरू की गई हो, ऐसा नहीं दिखता है।

समिति ने कहा कि सरकार ने कई कदम उठाया है, लेकिन अधिकारियों की कमी एक ‘चिरस्थाई’ समस्या बनी हुई है।

समिति ने कहा, “यह दिखाता है कि वर्तमान में उठाए गए कदम युवाओं को सेना की तरफ खींचने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए इससे संबंधित डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजिकल रिसर्च (डीआईपीआर) या अन्य एजेंसियों की सलाह से अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत है।”

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