नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की पहली संस्कृत एनिमेटेड फिल्म ‘पुण्यकोटि’ के जरिए बेंगलुरू के आईटी पेशेवर व नवोदित फिल्मकार वी. रवि शंकर भारतीय संस्कृति व विरासत के संरक्षण में अपना छोटा सा योगदान देने के लिए तैयार हैं। इसके बारे में उनका मानना है कि इसे अपने देश की अपेक्षा पश्चिमी देशों में ज्यादा पहचान मिल रही है।
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की पहली संस्कृत एनिमेटेड फिल्म ‘पुण्यकोटि’ के जरिए बेंगलुरू के आईटी पेशेवर व नवोदित फिल्मकार वी. रवि शंकर भारतीय संस्कृति व विरासत के संरक्षण में अपना छोटा सा योगदान देने के लिए तैयार हैं। इसके बारे में उनका मानना है कि इसे अपने देश की अपेक्षा पश्चिमी देशों में ज्यादा पहचान मिल रही है।
मशहूर संगीतकार इलैयाराजा फिल्म में संगीत दे रहे हैं, जबकि जानी-मानी अभिनेत्री रेवती फिल्म में वॉइसओवर कर रही हैं। फिल्म की कहानी कर्नाटक के एक मशहूर लोकगीत पर आधारित है।
यह स्पष्ट करते हुए कि फिल्म के लिए संस्कृत भाषा क्यों चुनी, शंकर ने आईएएनएस को दिए ईमेल साक्षात्कार में बताया, “यह एक सिनेमाई प्रयोग है।”
उन्होंने कहा, “संस्कृत दुनिया की सबसे संरचित, संक्षिप्त और वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है। इसे हजारों विद्वानों के प्रयासों के माध्यम से विकसित होने में एक हजार साल लग गए। यह एकमात्र भाषा है जो शब्दों के बजाय इंजीनियरिंग रूट ध्वनियों के माध्यम से बनाई गई है। इसमें एक एल्गोरिदम संबंधी व्याकरण है और यह मस्तिष्क के कई ज्ञानात्मक क्षेत्रों को विकसित करती है। भारत में कई लोगों को इसके बारे में पता नहीं है।”
45 वर्षीय शंकर ने कहा, “और बोली जाने वाली संस्कृत साहित्यिक कार्यों में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा के विपरीत सरल है। पश्चिम इसे समझने की कोशिश कर रहा है। अगर हम इसे मरने दें तो यह शर्म की बात होगी। हम यह बताने के लिए पश्चिम से मुहर पाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि हमारी विरासत कितनी अच्छी है। इसलिए, यह हमारी अपनी संस्कृति और विरासत में मेरा छोटा सा योगदान है।” शंकर की बेटी स्नेहा, जो संस्कृत अच्छी तरह से बोल लेती हैं, उन्होंने फिल्म के लिए डबिंग आर्टिस्ट के रूप में काम किया है।
शंकर ने बताया कि कोई भी निर्माता संस्कृत फिल्म के साथ जुड़कर जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं था, इसलिए उन्होंने इसके निर्माण के लिए क्राउडफंडिंग (भीड़ से पैसे जुटाना) का सहारा लिया।
फिल्म को क्राउंडफंडिंग के दो चरणों से होकर गुजरना पड़ा। 2015 में पहले चरण में प्री-प्रोडक्शन के लिए 300 लोगों की सहायता से 40 लाख रुपये इकट्ठा हुए और प्रोडक्शन का काम पूरा करने व प्रचार के लिए दूसरे चरण में 36 लाख रुपये एकत्र हुए।
शंकर इलैयाराजा और रेवती के जुड़ने से बेहद खुश हैं, जो सिनेमा में प्रयोग को प्रोत्साहित करते हैं और परिणाम की परवाह किए बिना फिल्म का हिस्सा बन गए।
शंकर ने कहा, “उनके जुड़ने से निश्चित रूप से परियोजना में रुचि बढ़ी है।”
फिल्म की कहानी एक बछड़े के प्रति मां के प्यार के बारे में है।
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