नई दिल्ली, 19 नवंबर (आईएएनएस)। रुचिकर तरीके से पढ़ाना ही भारत में संस्कृत को लोकप्रिय बनाने का एक मात्र उपाय है। यह बात ब्रिटेन स्थित एक संस्कृत शिक्षिका ने कहीं है।
नई दिल्ली, 19 नवंबर (आईएएनएस)। रुचिकर तरीके से पढ़ाना ही भारत में संस्कृत को लोकप्रिय बनाने का एक मात्र उपाय है। यह बात ब्रिटेन स्थित एक संस्कृत शिक्षिका ने कहीं है।
‘लर्न संस्कृत थ्रू योर फेवरिट प्रेयर्स’ की सह लेखक रोहिणी बख्शी एक बार करीब-करीब संस्कृत में फेल हो गई थीं, लेकिन अब वह बहुधा भारतीय भाषाओं की जननी कही जाने वाली इस प्राचीन भाषा को सीखने के लिए दूसरों को राजी करने में सक्रिय हैं।
बख्शी महसूस करती हैं कि संगीत, नाटक और कविता की भारतीयों के बीच गहरी पैठ है, इसलिए इनका संस्कृत की पढ़ाई में अधिकाधिक उपयोग किया जा सकता है। लंदन के एक कॉलेज में उन्होंने खुद ऐसा किया है।
बख्शी ने कहा कि सरकारी पहलों से संस्कृत की अपील के प्रचार में मदद मिल सकती है, लेकिन स्कूलों में इसे अनिवार्य विषय बना कर नहीं किया जा सकता है।
ई-मेल के जरिए एक साक्षात्कार में बख्शी ने कहा, “बच्चे किसी चीज से तब घृणा करते हैं, जब उन्हें उसे करने के लिए मजबूर किया जाता है।”
उन्होंने कहा कि बच्चों की पसंद उनसे छीनने की जगह सरकार को शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए।
बख्शी ने आगे कहा कि खास तौर पर जहां तक संस्कृत जैसी भाषा का सवाल है तो सामान्यत: शिक्षक प्रशिक्षण में सुधार की आवश्यकता है।
बख्शी और नारायणन नंबूदरी द्वारा लिखी गई 507 पृष्ठों की पुस्तक में भगवान विष्णु और शंकर को समर्पित 11 प्रार्थनाएं हैं।
बख्शी मानती हैं कि अच्छे शिक्षक से कक्षा में पढ़ना संस्कृत सीखने का सबसे अच्छा तरीका है।
उनका मानना है कि जब तक संस्कृत की पढ़ाई रुचिकर नहीं बनती है तब तक अधिकांश लोग इससे बचेंगे या कक्षा छोड़ देंगे।
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