सड़क पर भीख मांगने से अच्छा है बार में नाचना : सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। डांस बार पर अंकुश लगाने की महाराष्ट्र सरकार की जिद पर निशाना साधते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि आजीविका कमाने के लिए सड़कों पर भीख मांगने और ‘अस्वीकार्य जगहों पर जाने’ से कहीं बेहतर है बार में डांस करना।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की खंडपीठ ने कहा कि अश्लीलता रोकने के लिए नृत्य के पेशे को निशाना नहीं बनाना चाहिए।

खंडपीठ ने कहा, “एक राज्य के तौर पर आपको महिलाओं की गरिमा की रक्षा करनी है। लेकिन, आप यह नहीं कह सकते कि अगर कोई महिला कार्यस्थल पर जाती है और वहां अश्लीलता है तो वह जगह ही बंद हो जानी चाहिए।”

अदालत ने कहा, “महिलाओं की गरिमा की रक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। किसी प्रकार की अश्लीलता नहीं होनी चाहिए। आप इसके नियामक बन सकते हैं। लेकिन, आप यह नहीं कह सकते कि डांस बार पर प्रतिबंध लगा दिया जाए।”

अदालत ने इस पर जोर दिया कि डांस बार को इजाजत देने और अश्लीलता को रोकने के बीच संतुलन होना चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि डांस बार को कायदे-कानून से चलाने का मतलब इस पर रोक लगाना नहीं है। अदालत ने कहा कि ‘पूरी मानसिकता ही रोक लगाने वाली’ है।

खंडपीठ ने कहा, “जब अदालत (शीर्ष) कहती है कि डांस बार पर रोक नहीं होनी चाहिए तो वे (महाराष्ट्र सरकार) इसे रेगुलेशन के नाम पर रोक रहे हैं। आप डांस बार की अनुमति दे रहे हैं, लेकिन नियमों से निषेध थोप रहे हैं।”

अदालत ने यह बातें इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (आईएचआरए) की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहीं। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार ने डांस बार के नियमों को इतना कठिन कर दिया है कि इसे पूरा करते हुए बार चलाना असंभव है। उदाहरण के लिए इसमें एक नियम यह भी है कि किसी धार्मिक स्थल के एक किलोमीटर के दायरे में कोई डांस बार नहीं होना चाहिए।

आईएचआरए की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत भूषण ने कहा कि मुंबई में यह सोचना असंभव है कि डांस बार किसी धार्मिक स्थल के एक किलोमीटर की परिधि में ना हो।

अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि जिस तरह उसके पहले के आदेश का पालन करते हुए महाराष्ट्र सरकार ने डांस बारों को लाइसेंस जारी किया है, उसी तरह गृह विभाग को ‘तत्परता से’ डांस बार में काम करने वाले लोगों का सत्यापन करना चाहिए।

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