भोपाल, 12 नवंबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली ने शनिवार को तीन दिवसीय ‘लोक मंथन’ कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि सनातन धर्म ही राष्ट्रीय अस्मिता है। यह सार्वभौमिक और शाश्वत है। इसे आधुनिक संदर्भो में परिभाषित और अभिव्यक्त करना होगा।
संस्कृति विभाग, भारत भवन और प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कोहली ने कहा, “उपनिवेशवादी मानसिकता आज बाजार, उत्पादों, जीवन-शैली और भूमंडलीकरण के रूप में उपस्थित है। इससे निपटने के लिए स्वदेशी आंदोलन की जरूरत है। राष्ट्रीय अस्मिता मजबूत है, तो औपनिवेशवादी मानसिकता का कोई भी प्रकार या स्वरूप नुकसान नहीं पहुंचा सकता। राष्ट्रीय अस्मिता और सनातन धर्म शाश्वत होने के बावजूद धूमिल पड़ सकते हैं। इसे समय-समय पर साफ करने की जरूरत है।”
विधानसभा परिसर में आयोजित शुभारंभ समारोह में मौजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कहा कि भारत की अस्मिता को दैनंदिन कार्यो और हर विषय में अभिव्यक्त होना चाहिए। एक से अनेक होने और फिर अनेक से एक बने रहने की मूल भावना और दर्शन भारतीय जीवन में अभिव्यक्त हुआ है। इसी से औपनिवेशिक दुष्परिणाम से मुक्ति मिलेगी।
उन्होंने राष्ट्र और नेशन के अंतर को समझाते हुए बताया कि भारत ने एक राष्ट्र के रूप में दूसरों को ज्ञान और कौशल देकर समृद्ध किया। आज भारतीय अस्मिता के माध्यम से बदलाव की प्रक्रिया का उपकरण अपनाने की जरूरत है। भारत एक है और अखंड है क्योंकि यहां की अस्मिताओं में समन्वय रहा है।
जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा, “विज्ञान ने नींद छीन ली, हमारी मानसिक चेतना कुंद हुई है। शास्त्रों में कहा गया है कि मन की चिंता करो। भारतीय ऋषियों ने मन की चिंता की, पदार्थ की नहीं। पश्चिम के लिए विश्व एक बाजार है जबकि भारतीय दर्शन और धार्मिक परंपराओं में विश्व को परिवार माना गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “भोग की प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। भंडारण और संचय की प्रवृत्ति उचित नहीं है। उन्होंने आर्थिक क्षेत्र में लिए गए हाल के निर्णय के संदर्भ में कहा कि इससे संग्रह की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। यह निर्णय भारत में बड़ा परिवर्तन लाने वाला है। देश का बड़ा रूपांतरण होगा।”
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में बनाए गए आनंद मंत्रालय के संदर्भ में कहा कि पदार्थ से आनंद नहीं मिलता। जब तक प्रति, अपने मूल और निजता में नहीं लौटेंगे, खुशी नहीं मिलेगी।
इस मौके पर राज्यसभा सदस्य विनय सहस्रबुद्धे, विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ़ मुरली मनोहर जोशी, प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक सदानंद सप्रे एवं बड़ी संख्या में विद्वान एवं शोधकर्ता उपस्थित थे।
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