रांची, 12 नवंबर (आईएएनएस)। जनजातियों और मूल निवासियों के भूमि अधिकारों की हिफाजत के लिए दो भूमि अधिनियमों के संशोधन के रघुबर दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कदम ने झारखंड के दो जनजातीय नेताओं शिबु सोरेन और बाबूलाल मरांडी को एकजुट कर दिया है।
नवंबर 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद पहली बार दोनों नेताओं ने रघुबर दास सरकार के कदम का विरोध करने के लिए मंच साझा किया है। रघुबर सरकार छोटानागपुर टेनेंसी (सीएनटी) अधिनियम और संथाल परगना टेनेंसी (एसपीटी) अधिनियम को संशोधित कर रही है।
झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने अध्यादेशों को राष्ट्रपति के पास भेज दिया, और राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार से इस पर सुझाव मांगा। सरकार ने इस मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति (एसटी) आयोग के पास भेज दिया, जिसने झारखंड सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ सुझाव दिया है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख शिबु सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के साथ खूटी जिले में मंच साझा किया। दोनों नेताओं ने सीएनटी अधिनियम के 100 साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
सोरेन ने इस मौके पर कहा, “सीएनटी और एसपीटी अधिनियमों में कोई भी संशोधन स्वीकार्य नहीं होगा। दोनों भूमि अधिनियम राज्य की जनजातियों और मूल निवासियों की आत्मा हैं।”
मरांडी ने कहा, “ये संशोधन जनजातियों की जमीन हड़पने के लिए लाए गए हैं।”
शुक्रवार से पहले झामुमो दोनों अधिनियमों में संशोधनों का विरोध तो कर रहा था, लेकिन वह संयुक्त विपक्ष में शामिल नहीं था।
सोरेन और मरांडी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी थे और दोनों ने 2014 के लोकसभा चुनाव में दुमका सीट से एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। मरांडी ने भाजपा उम्मीदवार के रूप में सोरेन को दुमका से दो बार 1998 और 1999 में पराजित किया था। जनजाति समुदाय में सोरेन और मरांडी के पास काफी समर्थन है।
रविवार को संयुक्त विपक्ष भाजपा सरकार के प्रस्तावित दो भूमि अधिनियम संशोधनों के खिलाफ राजभवन के सामने धरना देंगे। संयुक्त विपक्ष में झामुमो, जेवीएम-पी, कांग्रेस और अन्य शामिल हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सोरेन और मरांडी के हाथ मिलाने का आने वाले वर्षो में दूरगामी असर होगा।
झारखंड सरकार सीएनटी और एसपीटी अधिनियमों में संशोधनों पर शीतकालीन सत्र में एक विधेयक लाने की योजना बना रही है। भाजपा के गठबंधन सहयोगी आल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) दोनों अधिनियमों में संशोधनों का विरोध कर रहा है।
आजसू के विधायक विकास मुंडा ने भूमि अधिनियमों में संशोधन के विरोध में जनजाति सलाहकार परिषद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन सत्ताधारी भाजपा ने पार्टी के भीतर विरोध के बावजूद इसे एक प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है।
भाजपा नेता भी सोरेन और मरांडी के साथ आने से चिंतित हैं।
मुख्यमंत्री दास ने शनिवार को सोरेन से मुलाकात की। कहा गया है कि दास ने सोरेन को 15 नवंबर के एक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया है।
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