बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने पांचवें और आखिरी बजट में भी उद्योग, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य, सेवा, शिक्षा तथा तकनीकी शिक्षा में कोई बदलाव नहीं किया। जनता तथा किसानों को अंतिम बजट में भी निराशा ही हाथ लगी है, इसलिए सरकार के पूरे कार्यकाल का परिणाम डबल सिफर ही रहा।
चौहान ने कहा कि प्रदेश में 2015 में फरवरी, मार्च तथा अप्रैल के महीने में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से कृषि फसलों को व्यापक क्षति हुई थी, जिससे किसानों ने आत्महत्या का रास्ता अपना लिया था और अब लोक लुभावन देने के लिए बजट में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान किए जाने के लिए मात्र 4498 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जो किसानों के साथ धोखा है।
उन्होंने कहा कि सपा सरकार की मुआवजा नीति दोषपूर्ण होने के कारण पूरे किसानों को मुआवजा मिल ही नहीं पाया है। वहीं दूसरी तरफ सामान्य से कम वर्षा होने के कारण प्रदेश के सूखाग्रस्त जनपदों के साथ सरकार ने भेदभाव किया और सूखे से कृषि फसलों को हुई क्षति से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए।
रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि गन्ना किसानों की बात की जाए तो सरकार ने अपने अब तक के पूरे कार्यकाल में गन्ना मूल्य निर्धारण में तो कोई बढ़ोतरी की ही नहीं और बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 1336 करोड़ रुपये जो प्रस्तावित है वह अपर्याप्त है, क्योंकि सरकार मिल मालिकों को तो ब्याज माफ करके खूब फायदा पहुंचाया, लेकिन गन्ना किसानों की सिर्फ अनदेखी ही की।
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