यह तथ्य आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर को उत्तर प्रदेश आईजी कार्मिक पी.सी. मीना द्वारा दी गई सूचना से सामने आया है।
आरटीआई सूचना के अनुसार, उप्र में 78 आईपीएस अफसर ऐसे हैं, जिनका पांच साल की अवधि में 10 या उससे अधिक बार तबादला हुआ। इनमें उमेश कुमार श्रीवास्तव के सर्वाधिक 20 तबादले हुए जबकि अनीस अहमद अंसारी का 18, राजेंद्र प्रसाद पांडेय का 17 तथा दिलीप कुमार का 16 बार तबादला हुआ। हाल में निलंबित हुए हिमांशु कुमार सहित पांच आईपीएस अफसरों का पांच वर्षो में 15 बार तबादला हुआ।
अखिलेश सरकार में 215 आईपीएस अफसरों का पांच या उससे अधिक बार तबादला हुआ। इस अवधि में सबसे कम तबादला होने वालों में संजय तरडे (एक बार सीबी-सीआईडी) और कमल सक्सेना (एक बार गृह विभाग) रहे, जिनका पूरे काल में एक ही बार तबादला हुआ।
आरटीआई सूचना के अनुसार, इस अवधि में सबसे अधिक समय तक निलंबित रहने वाले अफसर आईजी अमिताभ ठाकुर थे, जिन्हें 10 माह निलंबित रखा गया जबकि अन्य निलंबित होने वाले अफसर कुछ दिनों या 2-3 महीने में बहाल कर दिए गए।
इन सूचना के अनुसार, उप्र में एक आईपीएस अफसर की सेवा अवधि में 27.3 तबादले का औसत पाया गया। पूरी सेवा अवधि में सर्वाधिक तबादला आईजी प्रमोद कुमार मिश्रा का है, जिनका 33 साल में 55 बार तबादला हुआ।
इसके अलावा आईजी विजय कुमार गर्ग का 52 बार, डीआईजी उमेश कुमार श्रीवास्तव तथा आईजी आर.के. स्वर्णकार का 51 बार तथा एडीजी गोपाल लाल मीना का 50 बार तबादला हुआ है। उप्र में 50 ऐसे आईपीएस अफसर हैं, जिनका पूरे सेवा में 40 या अधिक बार तबादला हुआ है।
नूतन ठाकुर के अनुसार, इन भारी तबादलों का परिणाम यह रहा कि इस पांच वर्ष की अवधि में औसतन 1.3 आईपीएस अफसर प्रति दिन की दर से तबादले हुए जो प्रति आईपीएस छह तबादले का औसत है।
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