मुंबई, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना सांसद संजय राउत द्वारा समन का जवाब न देने से नाराज बम्बई उच्च न्यायालय ने सोमवार को उन्हें चेताते हुए कहा कि यदि वह खुद न्यायालय में पेश नहीं हुए, तो अगली सुनवाई के दौरान न्यायालय उन्हें अपने तरीके से पेश करने को बाध्य होगा।
न्यायमूर्ति जी.एस.पटेल ने शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे द्वारा छोड़ी गई वसीयत की वैधता से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान कहा, “यदि वह खुद न्यायालय में पेश नहीं होते हैं, तो न्यायालय अपने तरीके से उनकी पेशी सुनिश्चित करेगा।”
शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक राउत ने न्यायालय द्वारा 26 अगस्त को भेजे गए समन का जवाब नहीं दिया। न्यायालय ने बाल ठाकरे के मंझले बेटे जयदेव ठाकरे के लिए गवाह के रूप में जिरह के लिए राउत को पेश होने के लिए कहा है।
न्यायालय ने या तो ‘सामना’ के संपादक (उद्धव ठाकरे) या फिर कार्यकारी संपादक (राउत) को मामले में पेश होने के लिए कहा है।
राउत के एक सहयोगी ने न्यायालय से कहा है कि वह समन का जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि वह मुंबई से बाहर हैं और 18 अक्टूबर तक वापस लौटेंगे।
इसके बाद, न्यायमूर्ति पटेल ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 27 अक्टूबर मुकर्रर करते हुए राउत को पेशी के लिए अंतिम मौका दिया है।
दिवंगत बाल ठाकरे के बेटों -जयदेव व उद्धव- के बीच पिता की वसीयत को लेकर विवाद है, जिसपर ठाकरे ने दिसंबर 2011 को हस्ताक्षर किया था। वसीयत के मुताबिक, पारिवार की अधिकांश संपत्ति बड़े बेटे उद्धव ठाकरे के नाम की गई है।
जयदेव ने कई आधार पर वसीयत को चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि वसीयत पर हस्ताक्षर करते समय उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे।
dharmpath.com dharmpath