मलप्पुरम(केरल), 12 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मंगलवार को यहां एक अंतरधर्म सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया।
अंसारी ने कहा कि विभिन्न धर्मो और धार्मिक पंरपराओं से जुड़े लोगों में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और समझ होनी जरूरी है, ताकि वे विभिन्नताओं के बावजूद साथ मिलकर रह सकें।
अंसारी ने कहा, “सहिष्णुता एक गुण है, जो कट्टरता से मुक्ति दिलाता है और यह इस नियम पर आधारित है कि अगर हम दूसरों से अच्छा व्यवहार चाहते हैं तो हमें भी उनके साथ अच्छा व्यवहार करना होगा। यह विभिन्न धर्मों, मान्यताओं या अन्य प्रकार के विभाजनों में संघर्ष के बिना ही समाज को संचालित करने का व्यवहारिक सूत्र है।”
स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उनका उद्धरण देते हुए अंसारी ने कहा कि एक समावेशी और बहुलतावादी समाज के निर्माण के लिए केवल सहिष्णुता ही काफी नहीं है, बल्कि इसके साथ स्वीकार्यता और समझ भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया के सभी बड़े धर्मो को स्वीकार किया है और केरल की धार्मिक बहुलतावाद की पुरानी परंपरा रही है।
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