नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। एनजीओ हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पहल समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड ने मंगलवार को अपनी दूसरी वर्षगांठ मनाई। समीर मलिक स्मृति दिवस पर 300 से ज्यादा लाभार्थी अपने परिवार सहित पहुंचे।
इस मौके पर एनजीओ के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने अपने व्याख्यान में कहा कि कोई भी अपने आर्थिक हालात के वजह से मौत के मुंह में न जाए, दो साल पहले इस सोच के साथ समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड की शुरुआत हुई।
उन्होंने कहा कि कोई भी दिल का रोगी, जिसे सर्जरी की जरूरत है और इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ है तो वह इस फंड के लाभ लेने के लिए हेल्पलाइन नंबर 9958771177 पर कॉल कर सकता है। इलाज के लिए चुने जाने के बाद पीड़ित की सर्जरी मेदांता-द मेडिसिटी और नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट जैसे प्रमुख अस्पतालों में की जाती है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि देश में जन्मजात दिल के रोगों की संख्या बहुत अधिक है। यहां तक कि हर साल देश में 1.5 लाख बच्चे जन्मजात दिल की समस्याओं के साथ जन्म लेते हैं, जिन्हें उचित उम्र में सर्जरी करके ठीक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि र्युमेटिक हार्ट डिसीज क्रॉनिक दिल का रोग है जो र्युमेटिक बुखार की वजह से होता है, जिसे रोका जा सकता है। मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया का मानना है कि लोगों को जागरूक करके, समय पर इलाज और आर्थिक मदद देकर, ज्यादातर दिल के रोग रोके और ठीक किए जा सकते हैं।
विख्यात सांस्कृतिक हस्ती पद्मविभूषण डॉ. सोनल मान सिंह ने कहा, “मैं हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया को उनके द्वारा किए गए कार्यो और बचाई गई जानों के लिए बधाई देती हूं। हमारा संविधान सभी को जीवन जीने का अधिकार देता है जो सेहतमंद रहने से ही असल मायने में पूरा हो सकता है।”
उन्होंने कहा, “अगर हम मिल कर जरूरतमंदों की मदद करें, सेहत की संभाल के लिए जागरूकता फैलाएं तो हमारा देश मौजूदा स्वास्थ समस्याओं से बाहर निकल सकता है।”
मेदांता-द मेडिसीटी के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन और नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के सीईओ डॉ. ओपी यादव ने कहा कि जांच और इलाज के तरीकों में तरक्की होने से विकसित देशों में हर तरह के दिल के रोगों में जान जाने की संभावना कम हो गई है।
dharmpath.com dharmpath