नई दिल्ली, 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को शहर में वाहनों का सम और विषम संख्या वाले नंबर प्लेट के आधार पर अलग-अलग दिन परिचालन के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया और कहा कि यह फैसला प्रायोगिक तौर पर लिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के फैसले के विरुद्ध दाखिल की गई दो जनहित याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं दिया और मामले की सुनवाई के लिए 23 दिसम्बर की तिथि निर्धारित की।
पीठ ने कहा, “आप क्यों यह याचिका दाखिल कर रहे हैं? दिल्ली सरकार विभिन्न पक्षों से बात कर रही है। वह इसे प्रयोग के तौर पर एक जनवरी 2016 से लागू करेगी। इस संबंध में कोई नीति नहीं बनाई गई है या कोई अधिसूचना नहीं जारी की गई है। सिर्फ प्रस्ताव आया है। आप जनहित याचिका का उपयोग सरकार पर सिर्फ दबाव बनाने के लिए नहीं कर सकते हैं।”
याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि सरकार विभिन्न समूहों से बातचीत कर रही है। इसलिए याचिका को खारिज किया जाए।
एक याचिका वकील श्वेता कपूर ने तथा दूसरी सर्वेश सिंह ने दाखिल की थी।
दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक जनवरी 2016 से शहर में सम और विषम नंबर प्लेट वाले वाहनों को क्रमश: सम और विषम तिथियों को चलने की अनुमति देने का फैसला किया है।
एक याचिका में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया और कहा गया, “शहर में असुरक्षा महसूस करने वाली महिलाएं सूर्यास्त के बाद या देर रात यदि सक्षम हों तो अपने वाहन का इस्तेमाल करना चाहती हों तो अब उन्हें हर अगले दिन मुश्किल का सामना करना होगा।”
याचिका में विकलांगों की समस्या भी उठाई गई, जो अपने लिए अलग तरह के निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं और जिनके लिए सार्वजनिक वाहनों से यात्रा मुश्किल होती है।
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