नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली को अधिक पारदर्शी व मानक आधारित बनाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं।
न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर, न्यायमूर्ति जे.चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ तथा न्यायमूर्ति आदर्श कुमार की पीठ ने वरिष्ठ सुझाव आमंत्रित करते हुए वकील अरविंद दत्तार तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनंद से विचारों में समानता वाले सुझावों सहित अलग विचार वाले सुझावों को भी इकट्ठा करने को कहा।
कॉलेजियम के लिए एक स्थायी सचिवालय की स्थापना को लेकर याचिका के लिए भी सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि गुमनाम शिकायतों को कचरे के ढेर में फेंक दिया जाएगा।
विभिन्न सुझावों को एकत्रित करने के बाद दत्तार व आनंद अपनी रपट को सर्वोच्च न्यायालय को सौंपेंगे, जो मामले पर पांच नवंबर को सुनवाई करेगा।
दोनों सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 16 अक्टूबर की सुनवाई में कॉलेजियम प्रणाली को असंवैधानिक ठहराए जाने के फैसले के बाद सीधे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के नाम पूर्व न्यायाधीशों सहित प्रख्यात लोगों की तरफ से आए सुझावों को देखेंगे।
मद्रास बार एसोशिएशन के पक्ष में पेश हो चुके दत्तार ने एनजेएसी का विरोध किया था और अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद ने सरकार का पक्ष लिया था।
सुनवाई की शुरुआत में न्यायमूर्ति केहर ने कहा कि 16 अक्टूबर को एनजेएसी को असंवैधानिक करार देने के बाद से लेकर अब तक उन्हें कई सुझाव मिले हैं, जो इतने व्यापक हैं कि उनका समाधान करना बेहद मुश्किल है।
उन्होंने कहा, “इस कार्य में हमारी मदद करें। हमें व्यापक समूहों, प्रख्यात लोगों जैसे सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के सुझाव मिले हैं। हमें नहीं पता कि इस मामले में हम कैसे आगे बढ़ें। कृपया सभी सुझावों के समाधान में हमारी मदद करें।”
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