सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता आती है : रामनाथ कोविंद (फोटो सहित)

पटना, 22 फरवरी (आईएएनएस)। बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने यहां बुधवार को कहा कि बिहार में कई ऐसे स्थान है, जहां फिल्मों की शूटिंग की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता आती है, इसलिए हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना होगा।

गैर सरकारी संगठन ग्रामीण स्नेह फाउंडेशन (जीएसएफ) की ओर से आयोजित आठ दिवसीय बोधिसत्व फिल्म महोत्सव 2017 के सातवें दिन आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोविंद ने कहा, “बिहार की राजधानी पटना में सिनेमा का संगम आयोजित किया जाना एक स्वागतयोग्य कदम है। यह बिहार के लोगों के लिए गौरवान्वित करने वाला क्षण है।”

राज्यपाल ने समाज में जागरूकता लाने के लिए सिनेमा को सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि ऐसे महोत्सवों पर देश और देश के बाहर की सिनेमा दिखाई जाती है। इससे लोगों को अन्य राज्यों और देशों की संस्कृति को जानने का अवसर मिलता है।

राज्यपाल ने कहा, “बोधिसत्व अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव ने पूरी दुनिया को जोड़ने का काम किया है। इस फिल्मोत्सव के माध्यम से लोग एक-दूसरे की सांस्कृतिक विशेषताओं और परंपराओं से परिचित हो रहे हैं। अंतर्रास्ट्रीय स्तर के फिल्म महोत्सव से बिहार में उद्योग की संभावनाएं भी जागेंगी।”

इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और लेखक अदूर गोपालकृष्णन, गोविंद निहलानी, अभिनेता विनीत कुमार, अनंत गोयनका, त्रिपुरारी शरण, पंकज ठाकुर उपस्थित थे।

इस अवसर पर गोविंद निहलानी ने अपने संबोधन में कहा की इस फिल्मोत्सव को आयोजित करने का उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि उन्हें सिनेमा से जोड़ने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा की संस्था ने कला की दिशा में अच्छी शुरुआत की है, जिसे बिहार सहित अन्य देशों से आए लोगों ने काफी सराहा।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है की इस उत्सव में आए लोगों को सिनेमा की भावनाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।”

इस कार्यक्रम से पहले ‘सिनेमा-परिवर्तन का साधन’ विषय पर आयोजित एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में सिनेमा जगत से जुड़े कई विशेषज्ञों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

परिचर्चा में बोलते हुए जाने-माने निर्देशक और लेखक अदूर गोपालकृष्णन ने कहा, “वर्तमान समय में आधुनिक तकनीक से सिनेमा को काफी फायदा मिल रहा है। पहले के समय में फिल्मकारों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था, परंतु आज के समय में आधुनिक तकनीकों के आ जाने से फिल्मकारों को काफी सुविधाएं मिल रही हैं।”

इस क्रम में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अडूर गोपालकृष्णन ने कहा, “सही दिशा में दर्शकों का मनोरंजन करना का काम सिनेमा का होना चाहिए। बिहार की परंपरा शुरुआत से ही अच्छी रही है। इस फिल्मोत्सव का आयोजन कर इस परंपरा को बढ़ाने का काम किया है।”

हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेता नरेंद्र झा ने कहा, “यह फिल्मोत्सव अपने आप में एक इतिहास रचेगा। इस फिल्मोत्सव में कई हस्तियों ने हिस्सा लिया है, जिससे दर्शकों को बहुत सी नई चीजें सिखने को मिली हैं।”

कार्यक्रम के अंत में एनआईआईएफटी द्वारा एक फैशन शो का आयोजन किया गया, जिसका दर्शकों ने भरपूर लुफ्त उठाया।

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