नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। शिरोमणी अकाली दल व भाजपा गठजोड़ के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 1984 के सिख विरोधी दंगों के केस में आरोपियों के खिलाफ की टिप्पणियों ने न केवल सिखों में न्याय की उम्मीद जगा दी है, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया है कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए दोष सच्चे हैं।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक बयान में कहा, “अदालत की टिप्पणी कि, सिख भाईचारे के खिलाफ हुए इन दंगों में 3000 से अधिक लोग मारे गए, ने यह साबित किया है कि यह योजनाबद्ध तरीके से किया गया अपराध था।”
उन्होंने कहा, “यह 33 वर्षो में पहली बार हुआ है कि न्यायपालिका ने भी माना है कि आरोपी नहीं चाहते कि पीड़ितों को न्याय मिले। उन्होंने कहा कि चाहे पीड़ितों सहित सिख भाईचारे के मेंबर पहले दिन से यह कह रहे हैं कि आरोपी बहुत शक्तिशाली नेता हैं, जिनकी कांग्रेस पार्टी व इसकी सरकारें इतने सालों में मदद करती रही है, पर यह पहली बार है कि न्यायपालिका ने भी माना है कि आरोपी उनको जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का जवाब देने से भी भाग रहे हैं।”
सिरसा ने कहा कि 3 दशकों से भी अधिक समय से पीड़ित व उनके परिवार न्याय हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं पर कांग्रेस की सरकारें इन आरोपियों का हमेशा बचाव करती रहीं हैं और वह छूट जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब जब न्यायपालिका ने भी यह मान लिया है कि यह नेता मामलों की दोबारा जांच व मुकदमों की दोबारा सुनवाई से भाग रहे हैं तो सिखों को यह महसूस हो रहा है कि अब न्याय मिलने की संभावनाएं बढ़ गई है।
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