नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के वर्ष 2014 के मई में रायबरेली से हुए निर्वाचन को खारिज करने के लिए दायर एक याचिका पर गुरुवार को सुनवाई स्थगित कर दी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया के इशारे पर ही दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कांग्रेस के लिए वोट देने की अपील की थी।
न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे, आर. के. अग्रवाल और ए. एम. खानविलकर की पीठ ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा संबंधी एक अन्य याचिका में भी उठाया गया है जिसकी सात सदस्यीय संविधान पीठ जांच कर रही है और उसका परिणाम आने का इंतजार किया जाना चाहिए।
संविधान पीठ इसकी जांच कर रही है कि क्या धर्म, जाति, समुदाय और भाषा के नाम पर जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 123(3) प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने या उसमें उसके चुनाव एजेंट और तीसरे पक्ष को भी शामिल करता है।
अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने याची और रायबरेली के मतदाता रमेश सिंह की ओर से अदालत से अपनी याचिका पर सुनवाई करने का आग्रह किया। इस पर न्यायमूर्ति दवे ने कहा कि इस मुद्दे पर संविधान पीठ को फैसला करने दें।
उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर वोट मांगना उन मुद्दों में से एक है जिसे याचिकाकर्ता ने उठाया है।
जैन ने कहा कि इमाम बुखारी की अपील के मुद्दे के अलावा याची ने सोनिया गांधी के अब तक इटली की नागरिकता रखने का भी मुद्दा उठाया है।
याची इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 12 जुलाई के फैसले को चुनौती देने शीर्ष अदालत पहुंचे हैं। दोनों आरोपों को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था।
सोनिया गांधी की ओर से उच्च न्यायालय को बताया गया था कि उन्होंने धर्म के आधार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने से इनकार किया और कहा है कि उन्हें इटली की नागरिकता दी गई थी जिसका वह परित्याग कर चुकी हैं।
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