नई दिल्ली, 8 मार्च (आईएएनएस)। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विधायिका में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने वाले बहुप्रतीक्षित विधेयक को जल्द पारित करने की मांग की है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मंगलवार को लोकसभा में भाषण देते हुए सोनिया ने कहा, “बहुप्रतिक्षित महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।”
सोनिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अधिकतम सुशासन’ का अर्थ ‘महिलाओं को उनका अधिकार’ देना है।
उन्होंने कहा कि इसलिए संसद को महिला आरक्षण विधेयक जल्द से जल्द पारित करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “अधिकतम सुशासन का अर्थ आर्थिक वृद्धि को गति देने से कहीं अधिक आगे की बात है। इसका अर्थ प्रतिशोध की भावना के बिना चर्चा होने देना और विभिन्न विचारों को सुनना है। अपने अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन के बावजूद महिलाएं उत्पीड़न और भेदभाव का शिकार हो रही हैं।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनने की मांग के बाद स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव में लगभग 40 फीसदी महिलाएं निर्वाचित हुई हैं।
उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए कुछ राज्यों में शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य बनाए जाने को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा, “ऐसी चीजें अनुसूचित जाति और जनजाति समूहों की महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करती हैं। इस मामले पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।”
सोनिया ने कहा कि देश को इंदिरा गांधी के रूप में पहली महिला प्रधानमंत्री, प्रतिभा देवी सिंह पाटील के रूप में पहली महिला राष्ट्रपति और मीरा कुमार के रूप में पहली लोकसभा अध्यक्ष देने पर कांग्रेस को गर्व है।
सोनिया ने महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने की पैरवी करते हुए कहा कि देश में उन सामाजिक बुराइयों से लड़ने का साहस होना चाहिए, जिनका सामना महिलाएं कर रही हैं।
सरकार ने महिला दिवस के अवसर पर मंगलवार को संसद में केवल महिला सांसदों को ही बोलने देने का संकल्प लिया है।
विवादास्पद महिला आरक्षण विधेयक सबसे पहले 12 सितम्बर, 1996 को देवेगौड़ा सरकार ने पेश किया था। तभी से यह संसद में लटका हुआ है।
कांग्रेस नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दौरान 2010 में यह विधेयक राज्यसभा में पारित हो गया था। लेकिन, यह लोकसभा में आज तक पारित नहीं हो सका और इस पर कानून नहीं बन पाया।
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