हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति के बिगड़ने का आरोप लगाते हुए शिमला के सांसद वीरेंद्र कश्यप ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाल की कुछ घटनाओं से राज्य में माहौल पूरी तरह खराब हो गया है तथा राज्य की कानून व्यवस्था पंगु हो गई है।

कश्यप ने कहा कि आज राज्य में माफिया तथा गुंडाराज का बोलबाला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को तत्काल हस्तक्षेप कर संविधान के प्रावधनों के अनुरूप राज्य सरकार को उचित दिशा निर्देश प्रदान करना चाहिए ताकि राज्य में शांति एवं सुरक्षा का माहौल स्थापित किया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से बिगड़ती कानून व्यवस्था को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि राज्य के सांसदों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग के लिए बुधवार को लोकसभा में शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया था, ताकि राज्य के शांति प्रिय लोगों के जानमाल की रक्षा की जा सके और महिलाओं एवं युवतियों को राज्य में सम्मान के साथ जीने का माहौल मिल सके।

कश्यप ने बताया, “राज्य के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार सुबह केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की तथा उन्हें राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी। इन सांसदों ने शिमला के ऊपरी कोटखाई क्षेत्र में युवा लड़की के साथ हुए दुष्कर्म तथा उसकी निर्मम हत्या के जघन्य अपराध की केंद्रीय गृह मंत्री को जानकारी दी तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस सिलसिले में राज्य सरकार से आधिकारिक रिपोर्ट मांगने का अनुरोध किया।”

सांसद ने कहा, “घटना के 10 दिन तक राज्य पुलिस इस जघन्य अपराध के प्रति लापरवाह रही तथा उसने इस जघन्य अपराध पर लीपापोती करने का पूरा प्रयास किया। इस अपराध में लिप्त अपराधियों को राज्य सरकार पूरी तरह संरक्षण प्रदान कर रही है तथा राज्य की मशीनरी इन अपराधियों को बचाने में तुली हुई है। राज्य पुलिस ने इस अपराध की छानबीन करने के गंभीर प्रयास करने की बजाय राज्य सरकार ने इस केस को सीबीआई को सौंपकर अपना कत्र्तव्य पूरा कर लिया।”

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