दारुल उलून ने इसके साथ समाज में लिंगानुपात में अंतर पर चिंता भी जताई है।
दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी के हवाले से प्रवक्ता मौलाना अशरफ उस्मानी ने बताया कि भ्रूण की जांच के बाद चयनात्मक गर्भपात गैरकानूनी और गुनाह ही नहीं, इस्लाम के खिलाफ है। जो लोग ऐसा करते हैं, उनके लिए अल्लाह की नजरों में कोई दया नहीं है।
दारुल उलूम ने चयनात्मक लिंग गर्भपात को कोल्ड-ब्लडेड मर्डर करार देते हुए कहा कि मुस्लिम ऐसा कतई न करें और अपनी बेटियों की देखभाल अच्छे से करें।
उन्होंने बताया कि गर्भपात केवल उसी सूरत में कराने की इजाजत है, जब औरत की जान को खतरा हो और बिना गर्भपात औरत की जान न बच रही हो।
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