इंदौर- इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में आगामी चुनाव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को पहली बार संस्थान के करीब 150 साल के इतिहास में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन के कुछ सदस्य एफआईआर के खिलाफ प्रदर्शन करने वहां पहुंच गए। हालात को देखते हुए प्रबंधन ने मुख्य द्वार पर ताला लगाकर प्रवेश रोक दिया।
मामला उस वक्त बढ़ा जब संदीप पारेख, अनुराग जैन समेत कुछ सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का विरोध करने बड़ी संख्या में लोग कॉलेज पहुंच गए थे। हालांकि, तय व्यवस्था के तहत केवल पांच प्रतिनिधियों को ही प्राचार्य से मिलने की अनुमति दी गई। प्रदर्शन करीब एक घंटे तक चला था। जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्राचार्य से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
विवाद की जड़ वाइस ऑफ डीसी नाम से बने एक सोशल मीडिया पेज को बताया जा रहा है। इस पेज के जरिए कॉलेज, प्राचार्य और शिक्षकों की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। विरोध करने वाले सदस्यों का कहना है कि यह कार्रवाई गलत है और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।
ओल्ड डेलियंस के एक गुट ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संवैधानिक बदलावों के जरिए करीब पांच हजार सदस्यों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। उनका कहना है कि नए नियमों के तहत केवल सीमित लोग ही अध्यक्ष पद के लिए पात्र होंगे। जबकि, पहले चुनाव प्रक्रिया में शासकीय अधिकारियों की भूमिका रहती थी। इस बार एक पूर्व न्यायाधीश को चुनाव अधिकारी बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रदर्शनकारी गुट का दावा है कि उनके साथ करीब 220 सदस्य खड़े हैं।
प्रदर्शन के बाद सदस्य रीगल चौराहे स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे और वहां भी अपनी शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान ओल्ड डेलियंस के सदस्य राजेश अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने वाइस ऑफ डीसी प्लेटफॉर्म के जरिए केवल चुनाव से पहले जागरूकता फैलाने और बोर्ड के फैसलों पर सवाल उठाने की कोशिश की थी लेकिन जवाब देने के बजाय एफआईआर दर्ज करा दी गई।
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