‘2019 तक कालाबाजार खत्म करने का लक्ष्य अच्छा कदम’

नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में कालाबाजार को 2019 तक खत्म करने का लक्ष्य अच्छा कदम है और साथ ही जो सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है, वह है नकली उत्पादों की वजह से हुए घाटे से निपटना। यह बात विशेषज्ञों ने कही है।

ऑथेंटिकेशन सोल्यूशन प्रोवाइडर एसोसिएशन के प्रेसीडेंट यू.के. गुप्ता ने कहा, “हमारा उद्योग इन समस्याओं को जड़ से उखाड़ने मंे सरकार की मदद कर सकता है। एक ब्रांड का मालिक जो एक ऑथेंटिकेशन सोल्यूशन को एंप्लाय करता है, वह जालसाज की हिस्सेदारी में कटौती कर अपने व्यापार को बढ़ा सकता है। यह बढ़ता व्यापार करों और शुल्कों का अधिक संग्रह करके राजकोष में अधिक राजस्व लाएगा।”

मैसे फ्रैंकफर्ट इंडिया के कार्यकारी निदेशक राज मानिक ने कहा, “हम उन नीतियों के लिए तत्पर हैं, जो बुनियादी ढांचे में सुधार और व्यवसाय करने की सुविधा को सक्षम बनाएंगी। भारत में निवेश करने पर विचार कर रहे अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण पहलू हैं। विशेष रूप से मोटर वाहन, ऊर्जा और कपड़ा जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में। इसके अलावा आने वाले वर्षो में ‘मेड इन इंडिया’ पर सरकार का ध्यान सभी सेक्टरों में नकली उत्पादों पर अंकुश लगाने की नीतियों पर होना चाहिए।”

इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक सकरात्मक कदम के रूप में एस्पा व मैसे फ्रैंकफर्ट इंडिया के साथ मिलकर अगले महीने ऑथेंटिकेशन सोल्यूशन पर भारत के पहले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन व प्रदर्शनी ‘ऑथेंटिकेशन फोरम 2017’ का आयोजन कर रहा है।

एक सर्वेक्षण के अनुसार, सालाना नकली उत्पादों की वजह से विश्व स्तर पर होने वाला नुकसान 700 अरब डालर के बराबर है, जिसके कारण ब्रांड बाजार में कंपनियां अपनी हिस्सेदारी का 20 फीसदी खो देती हैं और कंपनियों को नकली उत्पादों की वजह से प्रति आमदनी और मुनाफे पर लगभग 10 प्रतिशत घाटे का सामना करना पड़ता है।

बजट अनुमान में 2015-16 के लिए भारत सरकार ने 5.6 खरब (सकल घरेलू उत्पाद का 3.9) रुपये पर अपने राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया था। वर्ष 2015-16 में सकल घरेलू उत्पाद 141 खरब रुपये था, सरकारी खजाने का अनुमानित नुकसान 26,190 करोड़ रुपये था। ऐसे में सरकारी खजाने को उनकी गतिविधियों के लिए राजस्व बढ़ाने की जरूरत है, उन्हंे उपभोक्ता हितों की रक्षा करने की भी जरूरत है।

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